केदारनाथ धाम के कपाट खुले, गूंजा “बम-बम भोले”; हजारों श्रद्धालु पहुंचे केदारघाटी

अक्षय तृतीया के शुभ मौके पर उत्तराखंड में चारधाम यात्रा की शुरुआत हो चुकी है। गंगोत्री और यमुनोत्री के बाद अब केदारनाथ धाम के कपाट भी विधि-विधान से खोल दिए गए हैं। श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा है और अब अगला पड़ाव बद्रीनाथ धाम है।

केदारनाथ धाम के कपाट खुले, गूंजा “बम-बम भोले”; हजारों श्रद्धालु पहुंचे केदारघाटी

उत्तराखंड की पवित्र वादियों में एक बार फिर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। अक्षय तृतीया के शुभ अवसर के साथ ही चारधाम यात्रा की शुरुआत हो गई है। सबसे पहले गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए, और अब केदारनाथ धाम के द्वार भी पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ खोल दिए गए हैं।

केदारनाथ मंदिर को इस खास मौके पर बेहद भव्य तरीके से सजाया गया। मंदिर परिसर को 51 क्विंटल ताजे गेंदे के फूलों से सजाया गया, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना रहा। जैसे ही कपाट खुले, पूरा इलाका “बम-बम भोले” और “जय केदार” के जयकारों से गूंज उठा।

देश के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने पहुंचे। कपाट खुलने के साथ ही अब चारधाम यात्रा ने पूरी रफ्तार पकड़ ली है।

चारधाम यात्रा का अगला और अंतिम पड़ाव बद्रीनाथ धाम है, जिसके कपाट 23 अप्रैल को खोले जाएंगे। इसके साथ ही यात्रा अपने पूर्ण स्वरूप में आ जाएगी।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, केदारनाथ भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक प्रमुख ज्योतिर्लिंग है। यहां हर साल छह महीने पूजा-अर्चना होती है। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं और भगवान की पूजा ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में की जाती है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की तलाश में हिमालय पहुंचे थे। भगवान शिव ने उनसे बचने के लिए बैल का रूप धारण किया, और जिस स्थान पर उनका पृष्ठ भाग प्रकट हुआ, वहीं आज केदारनाथ धाम स्थित है।

केदारनाथ धाम को मोक्ष का द्वार माना जाता है। आदि गुरु शंकराचार्य ने इस मंदिर का पुनर्निर्माण कराया था, जिसके बाद से यह स्थान सनातन आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।