वक्फ कानून: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी, SC ने अंतरिम आदेश पर फैसला सुरक्षित रखा
लोकसभा ने तीन अप्रैल 2025 को इस विधेयक को पारित किया था। अगले दिन राज्यसभा ने इसे मंजूरी दी और पांच अप्रैल को राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह अधिनियम बना।
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर तीन दिन की लंबी सुनवाई के बाद गुरुवार को अपना अंतरिम फैसला सुरक्षित रख लिया। मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने याचिकाकर्ताओं और केंद्र सरकार दोनों के तर्क विस्तारपूर्वक सुने।
वक्फ संशोधन कानून के प्रावधानों पर विवाद
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने संशोधित कानून के प्रावधानों को मौलिक धार्मिक अधिकारों के विरुद्ध बताया। उन्होंने केंद्रीय वक्फ परिषद में गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति और जिला कलेक्टर को वक्फ संपत्ति के निर्णय का अधिकार देने जैसे प्रावधानों पर अंतरिम रोक लगाने की अपील की।
केंद्र सरकार का बचाव और तर्क
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने संशोधित कानून का बचाव करते हुए कहा कि वक्फ बोर्ड धर्मनिरपेक्ष प्रकृति का है और इसके प्रबंधन में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना संविधान का उल्लंघन नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन धार्मिक गतिविधि नहीं है और इस्लाम में वक्फ एक अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है।
राजनीतिक और प्रशासनिक पक्ष
इस कानून को चुनौती देने वालों में कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद और एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी शामिल हैं। वहीं, भाजपा शासित छह राज्य सरकारें – हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, और असम –इस कानून के समर्थन में हैं। लोकसभा ने तीन अप्रैल 2025 को इस विधेयक को पारित किया था। अगले दिन राज्यसभा ने इसे मंजूरी दी और पांच अप्रैल को राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह अधिनियम बना।


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