बिहार दिवस में समाज कल्याण पवेलियन का जलवा, परंपरा और सशक्तिकरण का संगम

बिहार दिवस 2026 में पटना के गांधी मैदान में समाज कल्याण विभाग के पवेलियन में पारंपरिक कला, महिला सशक्तिकरण और सरकारी योजनाओं का भव्य प्रदर्शन किया गया।

बिहार दिवस में समाज कल्याण पवेलियन का जलवा, परंपरा और सशक्तिकरण का संगम

बिहार दिवस के मौके पर गांधी मैदान, पटना में समाज कल्याण विभाग का भव्य पवेलियन विधिवत शुरू हुआ, जहां तीन दिनों तक चलने वाले आयोजन में विभाग की योजनाओं और उपलब्धियों को अलग-अलग थीम पर प्रस्तुत किया जा रहा है। 22 से 24 मार्च तक आयोजित इस कार्यक्रम में विभाग के विभिन्न निदेशालय और इकाइयां मिलकर लोगों को योजनाओं से रूबरू करा रही हैं।

इस पवेलियन में बिहार की पारंपरिक कला और संस्कृति की झलक भी खास तौर पर देखने को मिल रही है। लहठी और सुजनी कला ने जहां लोगों का ध्यान खींचा, वहीं मिथिला पेंटिंग, हस्तकरघा, एप्लिक कार्य, हस्तनिर्मित आभूषण, ब्लॉक प्रिंट और तैयार परिधान जैसे उत्पादों ने राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में पेश किया।

सशक्तिकरण की झलक
पवेलियन में महिला हेल्पलाइन 181, शी-बॉक्स परामर्श केंद्र और पालना घर जैसी सेवाओं की जानकारी भी दी जा रही है। इसके साथ ही आशा किरण संस्था के बच्चों द्वारा बनाई गई कलाकृतियां और महिला लाभार्थियों के उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं, जो आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की प्रेरणादायक कहानी बयां करते हैं।

संस्थानों की भागीदारी
समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत आने वाले विभिन्न संस्थानों की सक्रिय भागीदारी इस आयोजन में देखने को मिल रही है। समाज कल्याण निदेशालय, आईसीडीएस निदेशालय, दिव्यांगजन से जुड़े कार्यालय, सामाजिक सुरक्षा और बाल अधिकार संरक्षण से जुड़े संस्थान मिलकर अपनी योजनाओं और सेवाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचा रहे हैं।

योजनाओं की जानकारी
इस पवेलियन के जरिए आम लोगों को विभाग द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं और सेवाओं की समग्र जानकारी दी जा रही है। महिला एवं बाल विकास निगम द्वारा महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों को भी प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

समावेशी विकास की पहल
समाज कल्याण विभाग का यह पवेलियन महिला सशक्तिकरण, बाल विकास, सामाजिक सुरक्षा और दिव्यांगजन उत्थान के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूती से सामने लाता है। यह पहल समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।