इजरायल का ‘सीक्रेट वेपन’ भारत के नाम, दुश्मनों की नींद उड़ाने वाली डील

पीएम मोदी की इजरायल यात्रा में भारत को मिल सकती है ‘गोल्डन होराइजन’ जैसी घातक मिसाइल। जानिए क्यों यह डील ब्रह्मोस से भी बड़ी मानी जा रही है।

इजरायल का ‘सीक्रेट वेपन’ भारत के नाम, दुश्मनों की नींद उड़ाने वाली डील
India Israel defence deal

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा को लेकर रणनीतिक हलकों में बड़ी हलचल है। संकेत हैं कि इस दौरे के दौरान भारत को ऐसा अत्याधुनिक हथियार मिलने जा रहा है, जिसे पाने की चाह दुनिया के कई देशों ने जताई थी, लेकिन इजरायल ने भरोसा सिर्फ भारत पर दिखाया। यह फैसला दोनों देशों के बीच वर्षों से बनती गहरी रणनीतिक समझ का प्रतीक माना जा रहा है।

रफ्तार और मारक क्षमता का नया पैमाना
जिस मिसाइल की चर्चा है, उसका नाम ‘गोल्डन होराइजन’ बताया जा रहा है। यह एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल फाइटर जेट से दागी जा सकती है और अंतिम चरण में इसकी रफ्तार इतनी तेज हो जाती है कि दुश्मन के डिफेंस सिस्टम के लिए इसे रोक पाना लगभग असंभव माना जा रहा है। तुलना करें तो भारत की चर्चित ब्रह्मोस मिसाइल से भी इसकी स्पीड और मारक क्षमता कहीं आगे बताई जा रही है।

बंकर से लेकर हाई-सिक्योरिटी ठिकानों तक खतरा
इस हथियार की खासियत सिर्फ इसकी गति नहीं, बल्कि इसकी पैठ भी है। माना जा रहा है कि यह गहरे बंकरों, पुख्ता किलों और यहां तक कि अत्यधिक सुरक्षित परमाणु ठिकानों को भी भेदने में सक्षम है। यही वजह है कि इसे उन ‘हार्ड टारगेट्स’ के लिए डिजाइन किया गया है, जहां पारंपरिक क्रूज मिसाइलें अक्सर नाकाम साबित होती हैं।

लंबी दूरी, गहरी स्ट्राइक क्षमता
रेंज के मामले में भी ‘गोल्डन होराइजन’ को बड़ा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इसकी पहुंच एक हजार से दो हजार किलोमीटर तक हो सकती है, जो मौजूदा भारतीय मिसाइल क्षमताओं से कहीं आगे है। यही दूरी इसे क्षेत्रीय संतुलन में एक अहम फैक्टर बनाती है।

टेक्नोलॉजी शेयरिंग में भारत को बढ़त
इजरायल का इस तकनीक को सिर्फ भारत के साथ साझा करना महज सौदेबाजी नहीं, बल्कि रणनीतिक भरोसे का संकेत है। दुनिया के कई देशों की दिलचस्पी के बावजूद भारत को प्राथमिकता देना बताता है कि दोनों देश रक्षा सहयोग को किस स्तर तक ले जाना चाहते हैं।

कूटनीति में रक्षा की केंद्रीय भूमिका
इसी भरोसे की झलक प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान में भी दिखती है, जो उन्होंने इजरायल की संसद नेसेट में दिया था। उन्होंने कहा था कि आज की अनिश्चित वैश्विक स्थिति में भरोसेमंद साझेदारों के बीच मजबूत रक्षा सहयोग समय की जरूरत है।

एक डील नहीं, पूरा डिफेंस पैकेज
बताया जा रहा है कि इस यात्रा में केवल एक मिसाइल तक बात सीमित नहीं रहेगी। मिसाइल और ड्रोन रोकने वाले एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम, लेजर आधारित सुरक्षा तकनीक और समुद्री व हवाई हमलों के लिए नई पीढ़ी की मिसाइलों पर भी सहमति बन सकती है।

मिसाइल शील्ड को नई मजबूती
इन करारों का सीधा असर भारत की बहु-स्तरीय मिसाइल सुरक्षा योजना पर पड़ेगा, जिसे 2035 तक पूरी तरह तैयार करने का लक्ष्य है। मौजूदा रूसी, इजरायली और स्वदेशी प्रणालियों के साथ यह नई तकनीक भारत की लंबी सीमाओं और विशाल समुद्री तट की सुरक्षा को और मजबूत करेगी।

उभरता नया सुरक्षा समीकरण
रणनीतिक विश्लेषक इसे केवल भारत-इजरायल समझौता नहीं, बल्कि एक बड़े सुरक्षा नेटवर्क की नींव के रूप में देख रहे हैं। संकेत हैं कि यह साझेदारी आगे चलकर एक ऐसे बहुपक्षीय गठबंधन का रूप ले सकती है, जो क्षेत्रीय अस्थिरता और कट्टरपंथी ताकतों के खिलाफ सामूहिक ताकत बनेगा।