रैपर से मेयर और अब पीएम पद के दावेदार: क्यों बालेन शाह बने नेपाल युवाओं की पहली पसंद?

काठमांडू के मेयर बालेन शाह ने अपने साहसिक फैसलों, डोजर अभियान, शिक्षा सुधार और युवाओं से सीधा जुड़ाव के कारण लोकप्रियता हासिल की है। जानिए कैसे रैपर से नेता बने बालेन शाह अब नेपाल के युवाओं की नजर में प्रधानमंत्री पद के दावेदार हैं।

रैपर से मेयर और अब पीएम पद के दावेदार: क्यों बालेन शाह बने नेपाल युवाओं की पहली पसंद?
Balen Shah

नेपाल के काठमांडू के मेयर बालेन शाह आज युवाओं की पहली पसंद बन चुके हैं। 35 साल की उम्र में उन्होंने वह कर दिखाया है जो दशकों से नेपाल के परंपरागत नेता नहीं कर पाए। दिलचस्प बात यह है कि उनका सफर राजनीति से नहीं बल्कि रैप और हिप-हॉप म्यूजिक से शुरू हुआ।

उनके गीत ‘बलिदान’ जैसे ट्रैक्स ने भ्रष्टाचार, असमानता और राजनीतिक अक्षमता के खिलाफ आवाज उठाई। युवाओं ने उन्हें अपनी निराशा और गुस्से का प्रतिनिधि माना। यही कारण रहा कि यूट्यूब पर उनके गानों को लाखों व्यूज़ मिले और उनकी एक विद्रोही छवि बनी।

मेयर चुनाव में करिश्माई जीत
भारत से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद बालेन शाह ने 2022 में काठमांडू मेयर चुनाव में स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में एंट्री ली। उन्होंने नेपाली कांग्रेस और CPN-UML जैसे बड़े दलों के उम्मीदवारों को हराकर 61,767 वोट हासिल किए। जीत का अंतर 23,000 से ज्यादा रहा, जिसने साफ कर दिया कि जनता बदलाव चाहती है।

'डोजर अभियान' से बनी बहादुर नेता की छवि
मेयर बनने के बाद बालेन शाह ने अतिक्रमण और अवैध निर्माणों के खिलाफ डोजर अभियान शुरू किया। फुटपाथ पर बने ढांचे, पुलिस चौकियां और यहां तक कि हवाई अड्डे पर पड़ी निर्माण सामग्री को हटाया गया। पाटन हाई कोर्ट ने इसे रोकने की कोशिश की, लेकिन बालेन अपने फैसले पर अड़े रहे। मानवाधिकार संगठनों ने उनकी आलोचना की, फिर भी युवाओं में उनकी छवि 'निर्भीक सुधारक की बनी।

नदियों और पब्लिक स्पेस को बचाने की कोशिश
उन्होंने तुकुचा नदी को अवैध कब्जों से मुक्त कराने का आदेश दिया। निजी इमारतों पर बुलडोज़र चलाने के फैसले से उन्हें अदालत और नेताओं के गुस्से का सामना करना पड़ा। लेकिन जनता ने उनकी इस कोशिश को सराहा क्योंकि इससे शहर के सौंदर्यीकरण और पर्यावरण संरक्षण का रास्ता साफ हुआ।

राजनीतिक दिग्गजों से टकराव
बालेन शाह सिर्फ स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने कई बार तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और उनकी पार्टी के नेताओं को चुनौती दी। अवैध विज्ञापनों और इमारतों पर कार्रवाई करने से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई।

UML नेताओं ने उन्हें धमकाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने पीछे हटने से इनकार किया। एक मौके पर वे प्रधानमंत्री की पार्टी से जुड़े सांसद के घर से बाल मजदूरों को छुड़ाने तक पहुंच गए। युवाओं ने इसे सत्ता से समझौता न करने वाले निडर नेता का उदाहरण माना।

कचरा प्रबंधन से शिक्षा सुधार तक
काठमांडू का सबसे बड़ा संकट था कचरे का ढेर, जिसे राजनीतिक उदासीनता ने और बिगाड़ दिया था। बालेन ने इस मुद्दे पर मंत्रालयों और निजी कंपनियों से मिलकर ठोस कदम उठाए। इसके साथ ही उन्होंने Textbook-Free Friday शुरू किया, जहां छात्रों को हफ्ते में एक दिन किताबों से अलग हटकर टेक्नोलॉजी, क्रिएटिविटी और लाइफ स्किल्स सीखने का मौका मिला।

युवाओं से सीधा जुड़ाव
बालेन शाह ने अपने शासन में पारदर्शिता लाने के लिए लाइव मीटिंग्स का प्रसारण शुरू किया। फेसबुक, X और इंस्टाग्राम पर उनकी सक्रियता ने उन्हें सीधे नागरिकों और खासकर युवाओं तक पहुंचाया। उनका पहनावा (ब्लेज़र, जींस, स्क्वायर चश्मा) और ग्लोबल नजरिया उन्हें युवाओं का आदर्श बनाता है।

ग्लोबल पहचान और युवा ऊर्जा
टाइम मैगजीन ने 2023 में उन्हें Top 100 Emerging Leaders की लिस्ट में शामिल किया। न्यूयॉर्क टाइम्स जैसी अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने उनकी कवरेज की। नेपाल में उनकी जीत के बाद स्वतंत्र उम्मीदवारों के लिए नई राह खुली।

युवाओं को लगता है कि बालेन शाह पुराने नेताओं की भ्रष्ट राजनीति का विकल्प हैं। इसी वजह से वे अब उन्हें सिर्फ मेयर नहीं बल्कि भविष्य का प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं।