BMC Election 2025: सीटों की खींचतान पर महायुति में तनाव, शिंदे गुट की 125 सीटों पर अड़ियल मांग, गठबंधन टूटने की चेतावनी
BMC Election 2025 से पहले महायुति में सीट बंटवारे को लेकर घमासान तेज। बीजेपी के 90 सीट ऑफर पर शिंदे गुट की 125 सीटों की मांग, मंत्री संजय शिरसाट ने गठबंधन टूटने की दी चेतावनी।
महाराष्ट्र में आगामी बीएमसी चुनाव को लेकर महायुति के भीतर सियासी खींचतान तेज होती जा रही है। बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच सीट बंटवारे पर सहमति बनती नहीं दिख रही है। बीजेपी की ओर से शिवसेना को 90 सीटों का प्रस्ताव दिया गया है, लेकिन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे 125 सीटों से कम पर राजी नहीं हैं। इसी बीच, अजित पवार गुट के भी बीएमसी चुनाव अकेले लड़ने की अटकलों ने महायुति की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
संजय शिरसाट की खुली चेतावनी
सीटों को लेकर चल रही रस्साकशी के बीच महाराष्ट्र सरकार में मंत्री संजय शिरसाट ने बीजेपी को साफ शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि अगर सीटों की जिद इसी तरह बढ़ती रही, तो बीजेपी-शिवसेना गठबंधन टूट भी सकता है। एनडीटीवी से बातचीत में शिरसाट ने इशारों-इशारों में बीजेपी के कुछ स्थानीय नेताओं पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि उन्हें अपनी ताकत जरूरत से ज्यादा बढ़ी हुई नजर आ रही है।
सीट बंटवारे पर ‘ताकत के हिसाब से फॉर्मूला’
संजय शिरसाट ने कहा कि ज्यादा सीटें मांगने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन इसकी भी एक सीमा होती है। जहां जिस दल की पकड़ मजबूत है, वहां उसी को ज्यादा सीटों पर लड़ना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यही फॉर्मूला पहले देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे ने तय किया था। शिरसाट के मुताबिक, समस्या वरिष्ठ नेतृत्व से ज्यादा कुछ स्थानीय नेताओं के बयानों की वजह से पैदा हो रही है।
बड़े भाई-छोटे भाई की राजनीति पर नाराजगी
उन्होंने यह भी कहा कि महायुति में रहते हुए चुनाव लड़ना सभी दलों की प्राथमिकता है। लेकिन जब लगभग सब कुछ तय हो जाने के बाद कार्यकर्ताओं के बीच ‘बड़े भाई-छोटे भाई’ जैसी बातें कही जाती हैं, तो इससे गठबंधन को नुकसान पहुंचता है। शिरसाट का कहना है कि इस तरह की बयानबाजी से महायुति में दरार पड़ सकती है, भले ही नेतृत्व स्तर पर एकजुटता बनी हुई हो।
फडणवीस नेतृत्व पर भरोसा, लेकिन अनुशासन की मांग
संजय शिरसाट ने दो टूक कहा कि आज भी शिवसेना (शिंदे गुट) महायुति के साथ खड़ी है और उसी के साथ चुनाव लड़ना चाहती है। उन्होंने देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए कहा कि ऊपर से स्पष्ट निर्देश आने चाहिए, ताकि स्थानीय स्तर पर अलग-अलग बयानबाजी बंद हो और गठबंधन को नुकसान न पहुंचे।
वक्त कम, विवाद ज्यादा, नुकसान तय
जब उनसे पूछा गया कि क्या बीजेपी नेताओं के बयानों से महायुति टूट सकती है, तो उनका जवाब चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा कि अगर कुछ लोग नहीं माने, तो गठबंधन टूटने का असर जरूर दिख सकता है। उनके मुताबिक, नामांकन और प्रचार का वक्त नजदीक है, ऐसे में आपसी खींचतान से सीधे तौर पर चुनावी नुकसान होगा और जनता को भी यह संदेश जाएगा कि महायुति एकजुट नहीं है।


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