संविधान दिवस 2025: पीएम मोदी का राष्ट्र के नाम संदेश, कर्तव्यों और लोकतांत्रिक गर्व पर जोर
संविधान दिवस 2025 पर पीएम मोदी ने देशवासियों के नाम विशेष पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने संविधान की महानता, मौलिक कर्तव्यों और पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं के महत्व पर जोर दिया। पढ़ें—प्रधानमंत्री ने संविधान दिवस पर क्या संदेश दिया।
26 नवंबर… वह तारीख जिसने भारत के लोकतांत्रिक इतिहास को हमेशा के लिए दिशा दी। इसी दिन भारत ने अपना संविधान अपनाया था, और इसी अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों के नाम एक प्रेरणादायी पत्र साझा किया है। पीएम ने बताया कि संविधान कैसे हर भारतीय के सपनों को ताकत देता है, क्यों मौलिक कर्तव्य हमारी प्रगति की कुंजी हैं और नए मतदाताओं को इस दिन को उत्सव की तरह क्यों मनाना चाहिए।
संविधान की ताकत पर पीएम मोदी का संदेश
संविधान दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्होंने पूरे देश के "परिवारजनों" के नाम एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने संविधान की महानता, मौलिक कर्तव्यों और पहली बार मतदान करने वाले युवाओं की जिम्मेदारी पर अपने विचार रखे हैं।
'26 नवंबर हर भारतीय के लिए गौरव का दिन'
अपने पत्र में पीएम मोदी ने लिखा कि 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने भारत का संविधान अंगीकार किया था, इसलिए यह दिन भारतीय लोकतंत्र की आत्मा को समर्पित है। NDA सरकार ने 2015 में इस दिन को औपचारिक रूप से संविधान दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया था।
उन्होंने कहा कि संविधान ही वह शक्ति है जिसने एक साधारण परिवार में जन्मे व्यक्ति को देश की सेवा करने का अवसर दिया। उन्होंने संसद भवन में प्रवेश के अपने अनुभव भी साझा किए—पहली बार सिर झुकाकर लोकतंत्र के मंदिर को नमन करना और बाद में संविधान को माथे से लगाना।
मौलिक कर्तव्यों पर महात्मा गांधी की सोच
पीएम मोदी ने संविधान के आर्टिकल 51A का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे मौलिक कर्तव्य सामाजिक और आर्थिक प्रगति का मार्ग दिखाते हैं। उनके अनुसार, महात्मा गांधी हमेशा नागरिकों के कर्तव्यों को प्राथमिकता देते थे और मानते थे कि कर्तव्य निभाने पर अधिकार अपने आप मिल जाते हैं।
उन्होंने देशवासियों से अपील की कि राष्ट्र ने हमें बहुत कुछ दिया है, इसलिए हमारे हर काम में कृतज्ञता और निष्ठा होनी चाहिए। जब हम कर्तव्य-भाव से कार्य करते हैं, तो हमारी हर कोशिश देश के विकास को गति देती है।
युवाओं को लोकतंत्र का सक्रिय सहभागी बनाने की अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पत्र में मतदान को सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए कहा कि हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह मतदान के किसी अवसर को न छोड़े।
उन्होंने सुझाव दिया कि 26 नवंबर को स्कूलों और कॉलेजों में 18 वर्ष पूरे करने वाले युवाओं के लिए विशेष सम्मान समारोह आयोजित किए जाएं, ताकि उनमें यह भावना विकसित हो कि वे अब देश की नीति निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा हैं। स्कूलों में हर साल फर्स्ट-टाइम वोटर्स को सम्मानित करने की परंपरा विकसित होनी चाहिए। इससे युवाओं में जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक गर्व की भावना मजबूत होगी।


आँखें न्यूज़ 24 




