दिल्ली ब्लास्ट कनेक्शन: डॉक्टर शाहीना ‘जमात उल मोमीनात’ की भारत प्रमुख, जैश-ए-मोहम्मद का महिला नेटवर्क बेनकाब!
दिल्ली ब्लास्ट केस में बड़ा खुलासा — फरीदाबाद से गिरफ्तार डॉ. शाहीना को जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग “जमात उल मोमीनात” की भारत प्रमुख बनाया गया था। एजेंसियां दिल्ली-फरीदाबाद में डंप डेटा और कम्युनिकेशन नेटवर्क की जांच में जुटीं।
दिल्ली ब्लास्ट केस की जांच में खुफिया विभाग को बड़ी सफलता मिली है। फरीदाबाद से गिरफ्तार की गई डॉ. शाहीना के संबंध अब सीधे जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) से जुड़े बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, शाहीना को आतंकी संगठन की महिला शाखा “जमात उल मोमीनात” (Jamaat-ul-Mominaat) का भारत प्रमुख बनाया गया था। उसका काम था—देश में महिलाओं के जरिए आतंकी नेटवर्क और रिक्रूटमेंट चैनल तैयार करना।
सादिया अजहर से था सीधा संपर्क
खुफिया सूत्रों के मुताबिक, सादिया अजहर, जो मसूद अजहर की बहन है, पाकिस्तान में इस महिला विंग की कमांड संभालती है। बताया जा रहा है कि डॉ. शाहीना सीधे सादिया के संपर्क में थी।
सादिया के पति यूसुफ अजहर वही आतंकी है, जो कंधार हाईजैक केस का एक मास्टरमाइंड था। इस कनेक्शन ने जांच एजेंसियों की नींद उड़ा दी है क्योंकि यह साबित करता है कि जैश भारत में एक बार फिर अंडरकवर नेटवर्क खड़ा करने की साजिश में जुटा था।
फरीदाबाद में सर्च ऑपरेशन जारी
अलफलाह यूनिवर्सिटी और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। धौज और फतेहपुर तगा गांव में लगातार तलाशी अभियान (Search Operation) चल रहा है। करीब 1000 से ज्यादा पुलिसकर्मी, क्राइम ब्रांच, रिजर्व पुलिस और स्थानीय थाने मिलकर ऑपरेशन में जुटे हैं। संदिग्धों के ठिकानों और संभावित छिपने की जगहों को खंगाला जा रहा है।
दिल्ली से फरीदाबाद तक डंप डेटा खंगाल रहीं एजेंसियां
दिल्ली ब्लास्ट के बाद अब जांच एजेंसियों ने सोशल मीडिया और मोबाइल नेटवर्क पर पूरी नजर जमाई हुई है। खासकर लालकिला क्षेत्र (Red Fort Zone) में पार्किंग और आसपास के इलाके से ऑपरेट होने वाले सभी मोबाइल फोनों का डंप डेटा (Dump Data) जुटाया जा रहा है।
यह डेटा यह पता लगाने में मदद करेगा कि ब्लास्ट से पहले किन नंबरों के बीच बातचीत या लोकेशन मैच हुई थी। इसी तरह, फरीदाबाद में भी डंप डेटा एनालिसिस से यह पता लगाया जा रहा है कि कितने लोग एक-दूसरे से संपर्क में थे।
जांच में ‘कम्युनिकेशन नेटवर्क’ सबसे अहम कड़ी
जांचकर्ताओं का मानना है कि जिस कार में विस्फोट हुआ, उसके पीछे कोई बड़ा कम्युनिकेशन नेटवर्क सक्रिय था। इसी वजह से एजेंसियां अब फोन लोकेशन, कॉल लॉग्स और इंटरनेट एक्टिविटी का बारीकी से अध्ययन कर रही हैं। यह जांच भविष्य में देशभर में सक्रिय महिला आतंकी मॉड्यूल्स की पहचान में अहम भूमिका निभा सकती है।


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