HDFC के मुखिया पर मुकदमा: शशिधर जगदीशन के खिलाफ FIR का सच क्या है?
एचडीएफसी बैंक के एमडी और सीईओ शशिधर जगदीशन पर वित्तीय फ्रॉड के आरोप लगाए गए हैं। बैंक ने इन आरोपों को दुर्भावनापूर्ण और वसूली प्रक्रिया से बचने की कोशिश बताया। जानें पूरा मामला।
देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक, एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) के एमडी और सीईओ शशिधर जगदीशन (Sashidhar Jagdishan) पर फाइनेंशियल फ्रॉड से जुड़े आरोपों के तहत FIR दर्ज हुई है। ये आरोप लीलावती कीर्तिलाल मेडिकल ट्रस्ट (LKMM ट्रस्ट) और मेहता फैमिली की ओर से लगाए गए हैं।
एचडीएफसी बैंक ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा है कि यह कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है, जिसका उद्देश्य पुराने लोन के भुगतान से बचना और वसूली प्रक्रिया को बाधित करना है।
एचडीएफसी बैंक का बयान
एचडीएफसी बैंक के प्रवक्ता ने कहा, बैंक के एमडी और सीईओ को उन कर्जदारों द्वारा निशाना बनाया जा रहा है, जिन्होंने 1995 में लिया गया कर्ज नहीं चुकाया।
मेहता फैमिली पर ₹65.22 करोड़ का बकाया
मेहता फैमिली ने लीलावती कीर्तिलाल मेडिकल ट्रस्ट के जरिए फाइनेंशियल फ्रॉड के आरोप लगाए। बैंक के अनुसार, लोन और ब्याज सहित 31 मई 2025 तक ₹65.22 करोड़ बकाया है। ट्रस्ट ने वसूली प्रक्रिया रोकने के लिए शिकायतें और कानूनी याचिकाएं दर्ज कीं।
बैंक ने कहा, जब कानूनी प्रक्रियाओं में सफलता नहीं मिली, तो ट्रस्ट और कर्जदारों ने सीईओ पर व्यक्तिगत हमले शुरू कर दिए।
शशिधर जगदीशन: बैंकिंग सेक्टर के सबसे बड़े चेहरों में शामिल
शशिधर जगदीशन ने अक्टूबर 2020 में आदित्य पुरी के स्थान पर एचडीएफसी बैंक के एमडी और सीईओ का पदभार संभाला।
- FY 2023 में सबसे अधिक वेतन: ₹10.55 करोड़।
- आरबीआई ने 2026 तक उनके कार्यकाल को मंजूरी दी है।
FIR का मकसद: वसूली प्रक्रिया को रोकना?
एचडीएफसी बैंक ने इस विवाद के केंद्र में मेहता फैमिली को रखा है। यह आरोप बदले की भावना से लगाए गए हैं और इनका मकसद वसूली प्रक्रिया से बचना है।


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