भारत पर अमेरिकी दबाव बेअसर, रूस से लगातार बढ़ा रहा तेल आयात

भारत ने अमेरिकी टैरिफ और दबाव को दरकिनार करते हुए अगस्त 2025 में रूस से 2.9 अरब यूरो का कच्चा तेल आयात किया। जबकि चीन का आयात घटा। राष्ट्रपति ट्रंप ने EU से भारत और चीन पर 100% टैरिफ लगाने की मांग की।

भारत पर अमेरिकी दबाव बेअसर, रूस से लगातार बढ़ा रहा तेल आयात

अमेरिका द्वारा 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने के बावजूद भारत ने रूस से तेल खरीद में कमी नहीं की है। अगस्त 2025 में भारत ने रूस से लगभग 2.9 अरब यूरो का कच्चा तेल आयात किया। यह आंकड़ा चीन के 3.1 अरब यूरो आयात के करीब है। दिलचस्प बात यह है कि जुलाई की तुलना में भारत का आयात थोड़ा बढ़ा, जबकि चीन का आयात 4.1 अरब यूरो से घटा।

अमेरिका का आरोप: भारत की खरीद से रूस को मिल रही है मदद
अमेरिका का कहना है कि भारत रूस से तेल खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन युद्ध में उसे आर्थिक सहारा दे रहा है। इसी दबाव के तहत अमेरिका ने 27 अगस्त से भारतीय निर्यात पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया। हालांकि, चीन, यूरोपीय संघ और अन्य देशों पर ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई।

ट्रंप का यूरोप को संदेश – भारत और चीन पर 100% टैरिफ लगाइए
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय संघ से अपील की है कि वह चीन और भारत से आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाए, ताकि दोनों देश रूस से ऊर्जा व्यापार कम करने पर मजबूर हों। अगस्त में चीन रूस से कच्चा तेल और कोयला खरीदने वाला सबसे बड़ा देश रहा, जबकि तुर्किये ने रूस से तेल उत्पाद और गैस सबसे ज्यादा खरीदी।

भारत का जवाब – सिर्फ हमें क्यों निशाना बनाया जाए?
भारत ने साफ कहा है कि केवल उसे टारगेट करना अनुचित है। जबकि चीन, तुर्किये और यूरोपीय संघ जैसे देश अब भी रूस से भारी मात्रा में ऊर्जा खरीद रहे हैं। भारत का कुल जीवाश्म ईंधन आयात अगस्त में 3.6 अरब यूरो रहा, जिसमें 510 मिलियन यूरो का कोयला और 282 मिलियन यूरो के रिफाइंड तेल उत्पाद शामिल थे। वहीं चीन का आयात 5.7 अरब यूरो रहा।

तुर्किये और यूरोपीय संघ का रूसी ऊर्जा व्यापार
तुर्किये तीसरे नंबर पर रहा जिसने अगस्त में 3 अरब यूरो का आयात किया। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा पाइपलाइन गैस का था। वहीं, यूरोपीय संघ चौथे स्थान पर रहा, जिसने 1.2 अरब यूरो का आयात किया। इसमें LNG और पाइपलाइन गैस प्रमुख रहे।

भारत का साफ रुख – अमेरिकी दबाव में नहीं झुकेगा
भारत ने दोहराया है कि अमेरिका का टैरिफ उसे रूस से तेल खरीदने से रोक नहीं पाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पहले भी कह चुकी हैं कि भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के हिसाब से फैसले करेगा और किसी के दबाव में नहीं आएगा।