आंध्र–छत्तीसगढ़ बॉर्डर पर सबसे बड़ी Forest Operation Success: 1 करोड़ का इनामी नक्सली कमांडर हिडमा ढेर
आंध्र–छत्तीसगढ़ सीमा पर बड़ी सफलता। 1 करोड़ का इनामी नक्सली कमांडर हिडमा और पत्नी राजे समेत 6 माओवादी ढेर। PLGA बटालियन को बड़ा झटका।
आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा से मंगलवार सुबह एक बड़ी सुरक्षा सफलता की खबर सामने आई है। नक्सल प्रभावित मरेडपल्ली इलाके में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच करीब-करीब एक घंटे तक चली मुठभेड़ में कुख्यात माओवादी कमांडर हिडमा ढेर हो गया। हिडमा पर 1 करोड़ रुपये का इनाम था और वह पिछले दो दशकों से देश के सबसे घातक नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता था।
बस्तर के आईजी सुंदरराज पी के अनुसार, इस एनकाउंटर में कुल छह नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। इनमें हिडमा की पत्नी राजे (राजक्का) भी शामिल है, जिस पर 40 लाख का इनाम घोषित था।
कौन था हिडमा?
हिडमा का जन्म 1981 में छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पूवर्ति गांव में हुआ था। असली नाम संतोष। वह CPI (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी का सबसे युवा सदस्य था।
वह PLGA Battalion-1 का चीफ़ था — माओवादियों की सबसे खतरनाक हमलावर यूनिट, जिसने कई बड़े हमलों को अंजाम दिया।
हिडमा के सबसे बड़े हमले
हिडमा ने करीब 26 बड़े हमलों की प्लानिंग और लीड की थी—
2010 दंतेवाड़ा हमला – 76 CRPF जवान शहीद
2013 झीरम घाटी नरसंहार – कांग्रेस नेताओं समेत 27 की मौत
2021 सुकमा–बीजापुर मुठभेड़ – 22 जवान शहीद
इन हमलों के बाद से सुरक्षा एजेंसियाँ उसे देश का “Most Wanted Maoist Commander” मानती थीं।
मुठभेड़ में मारे गए अन्य नक्सली
इस ऑपरेशन में शीर्ष ज़ोनल कमेटी सदस्य टेक शंकर और चल्लुरी नारायण उर्फ़ सुरेश भी ढेर हुए—दोनों पर 40 लाख का इनाम था। बाकी दो नक्सलियों की पहचान ग्रेहाउंड्स टीम कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, यह माओवादी संगठन के लिए “decisive setback” है।
इससे पहले सुकमा में भी हुई थी मुठभेड़
रविवार को सुकमा जिले में डीआरजी ने एक अन्य कार्रवाई में तीन नक्सलियों को ढेर किया था। इनमें दो महिला नक्सली भी थीं—दोनों पर ₹5 लाख का इनाम था।
मुठभेड़ स्थल से .303 राइफल, बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (BGL), विस्फोटक और अन्य हथियार बरामद हुए।
मारा गया नक्सली मादवी देवा स्नाइपर विशेषज्ञ था और नागरिकों की हत्याओं में शामिल था।
सुरक्षा बलों के लिए बड़ी राहत
हिडमा की मौत को सुरक्षा एजेंसियाँ पिछले एक दशक की सबसे बड़ी Anti-Naxal Success मान रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार—
इससे दंडकारण्य माओवाद सर्किट कमजोर होगा
PLGA बटालियन-1 का नेतृत्व ढह जाएगा
माओवादी हिंसा में आगे भारी गिरावट की उम्मीद है


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