मिडिल ईस्ट जंग के बीच राहत, एलपीजी से भरा जहाज भारत पहुंचा
मध्यपूर्व में युद्ध के बीच भारत को बड़ी राहत मिली है। एलपीजी से भरे दो बड़े भारतीय जहाज शिवालिक और नंदा देवी सुरक्षित तरीके से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत पहुंच रहे हैं, जिससे देश में गैस आपूर्ति को लेकर बनी चिंता कम हुई है।
मध्यपूर्व में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण पूरी दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई थी। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंका से भारत समेत कई देशों में एलपीजी की उपलब्धता को लेकर हड़कंप मच गया था। इसी बीच भारत के लिए राहत की खबर सामने आई है। कूटनीतिक प्रयासों के बाद एलपीजी से भरे दो बड़े भारतीय जहाज सुरक्षित तरीके से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत की ओर बढ़े हैं, जिससे देश में गैस आपूर्ति को लेकर बनी चिंता काफी हद तक कम हुई है।
मुंद्रा बंदरगाह पहुंचा पहला एलपीजी टैंकर
मध्यपूर्व में जारी युद्ध के बीच पहला एलपीजी टैंकर “शिवालिक” सोमवार शाम गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंच गया। इस जहाज में करीब 40 हजार मीट्रिक टन से अधिक एलपीजी लदी हुई है। भारत और ईरान के बीच हुई बातचीत के बाद ईरान ने इस जहाज को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी। इसे भारत की कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है। जानकारी के मुताबिक दूसरा एलपीजी टैंकर “नंदा देवी” भी मंगलवार सुबह तक भारत पहुंचने की उम्मीद है।
92 हजार टन एलपीजी लेकर निकले दो भारतीय जहाज
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोमवार को जारी एक बयान में बताया कि 14 मार्च को लगभग 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर दो भारतीय जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे थे। इनमें से “शिवालिक” सोमवार शाम करीब पांच बजे मुंद्रा बंदरगाह पहुंच गया। मंत्रालय के अनुसार जहाज से गैस उतारने की सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं और प्राथमिकता के आधार पर एलपीजी उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जबकि दूसरा जहाज “नंदा देवी” मंगलवार सुबह तक पहुंच सकता है।
भारत की गैस आपूर्ति में होर्मुज मार्ग की बड़ी भूमिका
भारत अपनी घरेलू जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी विदेशों से आयात करता है और इसमें से करीब 90 प्रतिशत आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होती है। पिछले करीब 17 दिनों से मध्यपूर्व में जारी युद्ध के कारण भारत के 22 कार्गो जहाज इस मार्ग में फंसे हुए हैं। ऐसे में इन दोनों जहाजों का सुरक्षित पहुंचना भारत के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे एलपीजी की आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी।
देश में एलपीजी सप्लाई फिलहाल स्थिर
सरकारी तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश में एलपीजी की आपूर्ति फिलहाल स्थिर बनी हुई है। कंपनी के मुताबिक 13 मार्च को जहां एलपीजी बुकिंग 88.8 लाख थी, वहीं 14 मार्च को यह घटकर करीब 77 लाख रह गई। इस दौरान ऑनलाइन बुकिंग का अनुपात बढ़कर 84 प्रतिशत से 90 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए गैस प्राप्त करना आसान हो गया है। कंपनी का कहना है कि देश में कहीं भी एलपीजी की कमी की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है और घरों तक सिलेंडर की आपूर्ति सामान्य तरीके से हो रही है।
पीएनजी उपभोक्ताओं से एलपीजी सरेंडर की अपील
सरकार ने एहतियात के तौर पर एक और पहल शुरू की है। जिन उपभोक्ताओं के घरों में पाइप के जरिए पीएनजी गैस की सुविधा उपलब्ध है, उन्हें एलपीजी कनेक्शन स्वेच्छा से सरेंडर करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि एलपीजी उन लोगों तक प्राथमिकता से पहुंचे जो पूरी तरह इसी ईंधन पर निर्भर हैं।
खाड़ी देशों से बड़ी संख्या में भारतीयों की वापसी
उधर मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव के बीच बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी स्वदेश लौट रहे हैं। 28 फरवरी 2026 से अब तक पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र से करीब दो लाख बीस हजार यात्री भारत पहुंच चुके हैं। संयुक्त अरब अमीरात के दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से कुछ समय के लिए उड़ानें रोकी गई थीं, लेकिन अब धीरे-धीरे सेवाएं फिर शुरू हो रही हैं। भारतीय और अमीराती विमान सेवाएं अबू धाबी, रस अल खैमाह और फुजैराह से सीमित उड़ानें संचालित कर रही हैं और सोमवार को भारत के विभिन्न शहरों के लिए 45 से अधिक उड़ानों का संचालन निर्धारित है।


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