एक तरफ Cyclone Maantha तो दूसरी ओर Hurricane Melissa का कहर! भारत से लेकर कैरेबियन तक मची तबाही की आहट
भारत में Cyclone Maantha और कैरेबियन में Hurricane Melissa ने एक साथ संकट खड़ा कर दिया है। आंध्र प्रदेश में अलर्ट जारी है तो वहीं जमैका में कैटेगरी 5 तूफान Melissa से तबाही की आशंका है। जानिए दोनों तूफानों की स्थिति, संभावित असर और विशेषज्ञों की चेतावनी।
भारत और दुनिया के दूसरे छोर कैरेबियन सागर में प्रकृति ने एक साथ अपने दो विनाशकारी रूप दिखाने शुरू कर दिए हैं। भारत में जहां साइक्लोन ‘मोंथा’ (Cyclone Maantha) के चलते दक्षिण के राज्यों में अलर्ट की स्थिति है, वहीं करीब 15 हजार किलोमीटर दूर जमैका (Jamaica) में ‘हैरिकेन मेलिसा’ (Hurricane Melissa) की दस्तक से दहशत फैल गई है।
जमैका में विनाश का प्रतीक बना Hurricane Melissa
कैटेगरी 5 के इस तूफान ने हैती और डोमिनिकन गणराज्य में पहले ही तबाही मचा दी है, जहां अब तक कम से कम 4 लोगों की मौत हो चुकी है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मेलिसा (Melissa) इस समय बेहद खतरनाक रूप में है — हवा की रफ्तार 250 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच चुकी है और समुद्री ज्वार (Storm Surge) की ऊंचाई 10 फीट तक उठने की आशंका है।
रीडिंग यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर लिज स्टीफेंस ने चेताया है कि — Melissa अब सिर्फ एक तूफान नहीं, बल्कि एक विनाशकारी सुपरस्टॉर्म बन चुकी है। जमैका को अकल्पनीय नुकसान के लिए तैयार रहना चाहिए।
उनके मुताबिक, क्लाइमेट चेंज (Climate Change) की वजह से आज के तूफान पहले से कहीं ज्यादा तीव्र और अनियंत्रित हो चुके हैं।
जमैका के दक्षिणी तट पर टकराने की आशंका
मौसम विभागों का अनुमान है कि 28 अक्टूबर, मंगलवार सुबह (स्थानीय समयानुसार 7 बजे) यह तूफान किंग्स्टन (Kingston) से करीब 60 मील पश्चिम में जमैका के दक्षिणी तट से टकरा सकता है।
यह इलाका देश के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे एयरपोर्ट, पावर प्लांट, फ्यूल टर्मिनल और शिपिंग पोर्ट से जुड़ा है। यदि 6 से 10 फीट ऊंची लहरें उठीं, तो इन सबके नष्ट होने का खतरा है। नॉर्मन मैनली इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जो संकरे हाईवे से जुड़ा है, विशेष रूप से भूस्खलन और जलभराव के खतरे में है।
Cyclone Maantha ने भी भारत में बढ़ाई चिंता
उधर भारत में Cyclone Maantha का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि मंगलवार सुबह तक यह “Severe Cyclonic Storm” का रूप ले सकता है। यह तूफान उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए आंध्र प्रदेश के काकीनाडा तट के पास 28 अक्टूबर की शाम या रात को टकरा सकता है।
इस दौरान हवा की रफ्तार 90 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। सरकार ने स्कूल बंद करने, ट्रेनों को रद्द करने, और समुद्री इलाकों में मछुआरों के प्रवेश पर रोक लगा दी है।
जलवायु परिवर्तन से बढ़ रही है तूफानों की रफ्तार और तीव्रता
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अब समुद्री तूफान न केवल ज्यादा तीव्र हो रहे हैं, बल्कि उनकी आवृत्ति और विनाशकारी क्षमता भी बढ़ गई है।
मोंथा और मेलिसा इसका जीवंत उदाहरण हैं — एक एशिया के तटों को चुनौती दे रहा है, दूसरा कैरेबियन सागर में कहर बन चुका है।


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