ईरान-इजराइल जंग में तेल-गैस पर वार, क्या भारत की सप्लाई पर पड़ेगा असर?

ईरान-इजराइल जंग के बीच तेल और गैस ठिकानों पर हमले तेज हो गए हैं। जानिए इसका भारत की एलएनजी सप्लाई और ऊर्जा सुरक्षा पर क्या असर पड़ सकता है।

ईरान-इजराइल जंग में तेल-गैस पर वार, क्या भारत की सप्लाई पर पड़ेगा असर?

ईरान और इजराइल के बीच जारी टकराव अब सीधे तेल और गैस ठिकानों तक पहुंच गया है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। इजराइल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड को निशाना बनाया, जिसके जवाब में ईरान ने कतर, यूएई और सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों पर हमले कर दिए। इस बढ़ती कार्रवाई से पूरा अरब क्षेत्र अस्थिर हो गया है और हालात कब सामान्य होंगे, इस पर अनिश्चितता बनी हुई है।

दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी हब पर हमला
ईरान ने पलटवार करते हुए कतर के रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी स्थित कतरएनर्जी के एलएनजी निर्यात केंद्र को निशाना बनाया। यह दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यात केंद्र माना जाता है, जहां से हर साल करीब 77 से 80 मिलियन टन गैस दुनिया भर में भेजी जाती है। वैश्विक एलएनजी व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी केंद्र से होकर गुजरता है, जो एशिया और यूरोप की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद अहम है।

यूएई में गैस ऑपरेशन प्रभावित
संयुक्त अरब अमीरात में भी इस संघर्ष का असर दिखने लगा है। हबशान गैस प्रोसेसिंग प्लांट ने अपना संचालन रोक दिया है, जो देश के गैस नेटवर्क का एक प्रमुख केंद्र है। यहां हर दिन भारी मात्रा में गैस प्रोसेस होती है और इसके ठप पड़ने से पूरे क्षेत्र की ऊर्जा आपूर्ति पर खतरे के संकेत मिल रहे हैं।

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराया खतरा
इस पूरे संघर्ष का असर केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। प्रभावित इलाके से दुनिया के करीब 25 प्रतिशत गैस भंडार जुड़े हुए हैं, जबकि लगभग 20 प्रतिशत एलएनजी और कच्चे तेल का प्रवाह इसी क्षेत्र से गुजरता है। सऊदी अरब ने भी अपने पूर्वी हिस्से में गैस संयंत्र पर हमले की पुष्टि की है, वहीं राजधानी रियाद के पास एक रिफाइनरी के नजदीक मिसाइल के टुकड़े गिरने की खबर है।

भारत पर असर को लेकर क्या कहते हैं जानकार
इस तनाव के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इसका असर भारत पर पड़ेगा। भारत अपनी गैस जरूरतों के लिए घरेलू उत्पादन और एलएनजी आयात दोनों पर निर्भर करता है। घरेलू गैस का उत्पादन देश के भीतर मौजूद स्रोतों से होता है, जबकि बाकी जरूरतें आयात से पूरी की जाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल घरों और वाहनों को मिलने वाली पाइप गैस आपूर्ति पर किसी बड़े असर की आशंका नहीं है, क्योंकि सरकार इन क्षेत्रों को प्राथमिकता देती है।

भारत की बढ़ती एलएनजी निर्भरता
हाल के वर्षों में एलएनजी भारत की कुल गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा कर रही है। वर्ष 2025 में देश ने करीब 24 से 25 मिलियन टन एलएनजी आयात किया, जिससे भारत दुनिया के प्रमुख खरीदारों में शामिल हो गया। इस आयात का बड़ा हिस्सा कतर से आता है, जिसके साथ लंबे समय के समझौते भी हैं।

होर्मुज मार्ग पर टिकी भारत की उम्मीद
भारत के कुल एलएनजी आयात का आधे से ज्यादा हिस्सा कतर से आता है, जबकि कुछ मात्रा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, रूस और अफ्रीकी देशों से भी आती है। लगभग 50 से 55 प्रतिशत एलएनजी आपूर्ति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते होती है, जिसे लेकर हालात संवेदनशील बने हुए हैं। हालांकि, ईरान ने भारतीय जहाजों के लिए रास्ता खुला रखा है, जिससे फिलहाल आपूर्ति बनी हुई है।

भंडारण की कमी और समझौतों पर निर्भरता
ऊर्जा क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भारत के पास एलएनजी का कोई बड़ा रणनीतिक भंडार नहीं है। गैस को केवल सीमित मात्रा में ही स्टोर किया जाता है, जिससे लंबी अवधि की आपूर्ति में बाधा आने पर चुनौती बढ़ सकती है। इसी बीच, भारत की पेट्रोनेट एलएनजी और कतरएनर्जी के बीच 20 साल का बड़ा समझौता भी जारी है, जो देश की ऊर्जा सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है।