आसमानी टॉर्च: भारतीय सेना का दुश्मनों पर आसमान से अचूक प्रहार, पाकिस्तान-चीन पर पैनी नजर
आसमानी टॉर्च और 52 डेडिकेटेड सैटेलाइट्स से भारत की सैन्य तैयारी में बड़ा कदम। जानिए SBS-3 प्रोग्राम, HAPS और अंतरिक्ष सिद्धांत के बारे में।
दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए भारतीय सेना को जल्द ही 'आसमानी टॉर्च' जैसी अत्याधुनिक तकनीक मिलने जा रही है। यह उपग्रह-आधारित प्रणाली सेना को दिन-रात दुश्मन के इलाकों और हिंद महासागर क्षेत्र की सतत निगरानी करने में सक्षम बनाएगी।
52 सैटेलाइट्स लॉन्च: भारत की विशाल तैयारी
इसरो अगले चार वर्षों में 52 डेडिकेटेड सैटेलाइट्स लॉन्च करेगा। इनमें से 21 उपग्रह इसरो द्वारा और शेष 31 उपग्रह तीन निजी कंपनियों की मदद से बनाए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट पर 26,968 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पहला उपग्रह अप्रैल 2026 तक लॉन्च किया जाएगा, जबकि बाकी सभी उपग्रह 2029 तक अंतरिक्ष में तैनात हो जाएंगे।
SBS-3 प्रोग्राम: निगरानी का तीसरा चरण
सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने पिछले वर्ष SBS-3 (स्पेस बेस्ड सर्विलांस) कार्यक्रम के तहत इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी। लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) और जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में उपग्रहों की तैनाती से दुश्मन के गली-मोहल्ले तक की गतिविधियों पर नजर रखना संभव होगा।
HAPS: भारतीय वायुसेना का छद्म उपग्रह
भारतीय वायुसेना तीन हाई एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम (HAPS) पर काम कर रही है। यह मानव रहित एयरक्राफ्ट, जिसे 'छद्म उपग्रह' कहा जा सकता है, 10 से 50 किमी की ऊंचाई पर लंबे समय तक तैनात रहकर खुफिया और निगरानी में मदद करेगा।
चीन और पाकिस्तान पर पैनी नजर
चीन के 1,000 से ज्यादा सैन्य उपग्रहों के मुकाबले भारत तेजी से अपने सैन्य उपग्रह कवच को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। इससे पाकिस्तान और हिंद महासागर क्षेत्र में दुश्मन की हर हलचल पर निगरानी रखने में मदद मिलेगी।


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