ईरान पर हमले जारी, लेकिन अरब देश चुप; अमेरिका की बढ़ती बेचैनी

ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच जारी टकराव ने मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा दिया है। ईरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है, जबकि खाड़ी देशों की निष्क्रियता पर अमेरिका की नाराजगी सामने आई है।

ईरान पर हमले जारी, लेकिन अरब देश चुप; अमेरिका की बढ़ती बेचैनी

मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच पिछले लगभग बारह दिनों से टकराव जारी है। इस दौरान ईरान अपने ऊपर हुए हमलों के जवाब में खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उनसे जुड़े ठिकानों को निशाना बना रहा है। हालात को देखते हुए अमेरिका ने अपने नागरिकों को क्षेत्र छोड़ने और वहां की यात्रा से बचने की सलाह जारी की है।

रियाद के सैन्य अड्डे से सैनिकों की वापसी शुरू
तनाव बढ़ने के बीच अमेरिका ने रियाद में स्थित अपने सैन्य अड्डे से सैनिकों को निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लगातार हो रहे ईरानी हमलों के बावजूद खाड़ी देशों की ओर से किसी बड़े सैन्य जवाब की कमी अमेरिका को परेशान कर रही है। वाशिंगटन को उम्मीद थी कि क्षेत्रीय सहयोगी देश ईरान के खिलाफ खुलकर कार्रवाई करेंगे, लेकिन फिलहाल ऐसा होता नहीं दिख रहा।

अमेरिकी सीनेटर की खाड़ी देशों पर नाराजगी
अमेरिका के वरिष्ठ सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अमेरिकी नागरिकों की जान जा रही है और अमेरिका अरबों डॉलर खर्च करके उस ईरानी शासन का मुकाबला कर रहा है जिसे वह क्षेत्र के लिए खतरा मानता है। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरी ओर सऊदी अरब जैसे सहयोगी देश केवल बयान जारी करते नजर आ रहे हैं और सैन्य स्तर पर ठोस भूमिका निभाने से बच रहे हैं।

जीसीसी देशों से अधिक सक्रिय भूमिका की उम्मीद
लिंडसे ग्राहम ने कहा कि गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के देशों को इस संघर्ष में ज्यादा सक्रिय होना चाहिए, क्योंकि यह लड़ाई उनके ही क्षेत्र में लड़ी जा रही है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर अभी भी ये देश अपनी सेना का इस्तेमाल करने को तैयार नहीं हैं, तो फिर आखिर कब करेंगे। उनके मुताबिक अगर स्थिति नहीं बदली तो इसके दूरगामी और गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

हमलों के बावजूद अरब देशों का संयम
लगातार हमलों के बावजूद अरब देशों ने अब तक ईरान के खिलाफ किसी बड़े सैन्य कदम से दूरी बनाए रखी है। सऊदी अरब ने हमलों की आलोचना जरूर की है, लेकिन सैन्य कार्रवाई में सीधे शामिल होने से इंकार किया है। इससे क्षेत्रीय समीकरण और जटिल होते नजर आ रहे हैं और अमेरिका की रणनीति पर भी सवाल उठ रहे हैं।

ईरानी राष्ट्रपति ने मांगी माफी, दी सफाई
इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने सरकारी टीवी पर आकर अरब देशों से माफी मांगते हुए कहा कि ईरान का इरादा उन देशों को निशाना बनाने का नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर उनके हवाई क्षेत्र या ठिकानों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों के लिए नहीं होगा तो तेहरान भी उन देशों पर हमला नहीं करेगा। हालांकि इसके बावजूद अमेरिकी ठिकानों को लेकर क्षेत्र में तनाव बना हुआ है।