मालेगांव केस: बरी होते ही भावुक हुईं साध्वी प्रज्ञा, बोलीं– संत होते हुए भी आतंकवादी कहा गया

मालेगांव बम धमाका केस में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को 17 साल बाद कोर्ट से राहत मिली। फैसला सुनते ही वे भावुक हो गईं और कहा, “मैं संत थी, फिर भी मुझे आतंकवादी कहा गया।” कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी किया, कहा– आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता।

मालेगांव केस: बरी होते ही भावुक हुईं साध्वी प्रज्ञा, बोलीं– संत होते हुए भी आतंकवादी कहा गया
साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर

17 साल पुराने मालेगांव बम धमाके के मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर सहित सभी आरोपियों को बरी कर दिया। जैसे ही कोर्ट ने फैसला सुनाया, साध्वी प्रज्ञा की आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने भावुक स्वर में कहा, मैं एक संन्यासी हूं, लेकिन मुझे आतंकवादी कहा गया। यह मेरे जीवन का सबसे बड़ा अपमान था। आज भगवा और हिंदुत्व की विजय हुई है।

NIA की विशेष अदालत ने अपने फैसले में कहा, आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले। जिस बाइक पर बम रखे जाने का आरोप था, उसका इंजन और चेसिस नंबर संदिग्ध पाए गए। RDX के इस्तेमाल का आरोप तो था, लेकिन कोई भौतिक प्रमाण नहीं मिला। Lt. Col. श्रीकांत पुरोहित के खिलाफ भी कोई ठोस सबूत अदालत में प्रस्तुत नहीं किया जा सका। अदालत ने कहा, आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता है।

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर: 'मैं जिंदा हूं क्योंकि मैं संन्यासी हूं'
कोर्ट में फैसला सुनाए जाने के बाद साध्वी प्रज्ञा सिंह जज के सामने भावुक हो गईं और रोते हुए बोलीं, एक साधु का जीवन जी रही थी, लेकिन मुझे राजनीतिक साजिश का शिकार बनाया गया। भगवा को बदनाम करने की कोशिश हुई, आज उसका अंत हुआ।