मालेगांव ब्लास्ट केस: पीड़ितों का सवाल– अगर ये आरोपी नहीं थे, तो असली गुनहगार कौन?

2008 के मालेगांव बम ब्लास्ट मामले में कोर्ट ने सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया है। इस फैसले से पीड़ित परिवारों में गहरा रोष है। कुल जमात-ए-तंजीम ने फैसले पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है।

मालेगांव ब्लास्ट केस: पीड़ितों का सवाल– अगर ये आरोपी नहीं थे, तो असली गुनहगार कौन?
Malegaon Blast

2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव शहर को एक भयानक धमाके ने दहला दिया था। इस ब्लास्ट में कई लोगों की जान गई थी और दर्जनों घायल हुए थे। इस मामले में वर्षों तक चली जांच और सुनवाई के बाद अब कोर्ट का फैसला सामने आया है, जिसमें सभी सात आरोपी बरी कर दिए गए हैं।

मालेगांव धमाके में अपनों को खोने वाले पीड़ित परिवार अब न्याय की उम्मीद टूटने से बेहद नाराज़ हैं। कुल जमात-ए-तंजीम नाम के संगठन ने सातों आरोपियों को बरी किए जाने पर गहरी आपत्ति जताई है।

संगठन के प्रभारी फिरोज अहमद आज़मी ने कहा, यह फैसला हमें झकझोर देने वाला है। 17 सालों से जांच एजेंसियां काम कर रही थीं। अगर ये आरोपी निर्दोष थे, तो असली गुनहगार कौन है?

हेमंत करकरे की जांच पर भी उठे सवाल
फिरोज आज़मी ने यह भी याद दिलाया कि इस केस की शुरुआती जांच महाराष्ट्र ATS के तत्कालीन प्रमुख हेमंत करकरे ने की थी और उन्होंने ठोस सबूतों के आधार पर केस दर्ज किया था। संगठन का कहना है कि जांच में जब सब कुछ स्पष्ट था, तो कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कैसे कर दिया?

संगठन की मांग है कि इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जाए और असली दोषियों की पहचान कर उन्हें सज़ा दिलाई जाए। हम चाहते हैं कि एजेंसियां निष्पक्ष होकर काम करें और पीड़ितों को न्याय दिलाया जाए।

विक्टिम अखलाक अहमद की पीड़ा
विस्फोट में घायल हुए अखलाक अहमद ने कहा कि वे इस फैसले को मुंबई हाई कोर्ट में चुनौती देंगे। हमें समझ नहीं आता कि कोर्ट ने किन आधारों पर फैसला दिया। इतने सारे लोग मरे, घायल हुए... लेकिन इंसाफ नहीं मिला।