खरीफ फसलों के लिए MSP में बड़ा इजाफा, धान, बाजरा, मूंगफली समेत 14 फसलों के किसानों को राहत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने 2025-26 के खरीफ फसलों के लिए MSP बढ़ाने और ब्याज छूट योजना को जारी रखने की मंजूरी दी। धान की MSP ₹2369 प्रति क्विंटल निर्धारित की गई है।
केंद्र सरकार ने विपणन सत्र 2025-26 के लिए खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि की घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह निर्णय किसानों की आय बढ़ाने और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।
किन फसलों का MSP बढ़ा और कितना?
सरकार ने 14 खरीफ फसलों के MSP में वृद्धि की है। यहां फसलों और उनके नए MSP का विवरण दिया गया है:
धान
सामान्य धान: ₹2369/क्विंटल (₹2300 से बढ़ाकर)
ग्रेड A धान: ₹2389/क्विंटल (₹2320 से बढ़ाकर)
ज्वार और बाजरा
ज्वार संकर: ₹3699/क्विंटल (₹3371 से बढ़ाकर)
बाजरा: ₹2775/क्विंटल (₹2625 से बढ़ाकर)
दालें
अरहर: ₹8000/क्विंटल (₹7550 से बढ़ाकर)
मूंग: ₹8786/क्विंटल (₹8682 से बढ़ाकर)
उड़द: ₹7800/क्विंटल (₹7400 से बढ़ाकर)
तिलहन
मूंगफली: ₹7263/क्विंटल (₹6783 से बढ़ाकर)
सूरजमुखी: ₹7721/क्विंटल (₹7280 से बढ़ाकर)
तिल: ₹9846/क्विंटल (₹9267 से बढ़ाकर)
अन्य फसलें
नाइजर सीड: ₹9537/क्विंटल (₹8717 से बढ़ाकर)
कपास (लंबा): ₹8110/क्विंटल (₹7521 से बढ़ाकर)
किसानों के लिए इसका महत्व
MSP में वृद्धि का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी फसलों की उत्पादन लागत से अधिक लाभ प्रदान करना है। इससे कृषि क्षेत्र में समृद्धि आएगी और किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी।
उत्पादन लागत से अधिक लाभ
नई MSP नीति के तहत किसानों को उनकी फसल की लागत पर कम से कम 50% अधिक समर्थन मूल्य मिलेगा।
आय में वृद्धि
MSP में वृद्धि से किसानों की आय बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
MSP में वृद्धि के प्रमुख लाभ
- कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा: MSP में वृद्धि से किसान नई तकनीकों और उन्नत बीजों में निवेश कर सकेंगे।
- फसलों की उत्पादकता में सुधार: अधिक कीमत मिलने से किसान बेहतर गुणवत्ता वाली फसल उगाने के लिए प्रेरित होंगे।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन: MSP में वृद्धि से ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक नकदी प्रवाह होगा, जिससे स्थानीय व्यापार और उद्योगों को फायदा होगा।


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