नोबेल शांति पुरस्कार 2025: डोनाल्ड ट्रंप की उम्मीदें टूटीं, मारिया कोरीना मचाडो को मिला सम्मान

नोबेल शांति पुरस्कार 2025 का ऐलान ओस्लो में हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उम्मीदें अधूरी रह गईं और वेनेज़ुएला की मारिया कोरीना मचाडो को पुरस्कार दिया गया। पढ़ें उनकी कहानी और नोबेल नामांकन प्रक्रिया के बारे में विस्तार से।

नोबेल शांति पुरस्कार 2025: डोनाल्ड ट्रंप की उम्मीदें टूटीं, मारिया कोरीना मचाडो को मिला सम्मान
Maria Corina Machado

नोबेल शांति पुरस्कार 2025 का ऐलान नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में किया गया। इस साल कुल 338 उम्मीदवारों को नामांकित किया गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम इस लिस्ट में सबसे ज्यादा चर्चा में रहा, क्योंकि उन्होंने कई बार इस पुरस्कार के लिए अपनी दावेदारी जताई थी। ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान समेत सात युद्धों को रोकने में योगदान दिया है।

हालांकि, इस साल ट्रंप का सपना अधूरा रह गया। नोबेल समिति ने वेनेज़ुएला की मानवाधिकार कार्यकर्ता मारिया कोरीना मचाडो को शांति पुरस्कार देने का निर्णय लिया।

मारिया कोरीना मचाडो: लोकतंत्र और मानवाधिकार की वीरांगना
मारिया कोरीना मचाडो को यह पुरस्कार वेनेज़ुएला में लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता को मजबूत करने के उनके संघर्ष के लिए दिया गया। नोबेल समिति ने उनके प्रयासों को तानाशाही के खिलाफ शांतिपूर्ण संघर्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों की सुरक्षा के रूप में सराहा।

मारिया कोरीना मचाडो का जन्म 7 अक्टूबर 1967 को वेनेज़ुएला की राजधानी कराकस में हुआ था। उन्होंने एंड्रेस बेलो कैथोलिक यूनिवर्सिटी से औद्योगिक इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और इंस्टिट्यूटो डी एस्टुडीओस सुपीरियोर्स दे एडमिनिस्ट्रासियन से वित्त में ग्रेजुएशन किया।

नोमिनेशन प्रोसेस और ट्रंप की हार
इस बार ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए 8 देशों ने नामांकित किया था, जिनमें पाकिस्तान, इजराइल, अमेरिका, आर्मेनिया, अजरबैजान, माल्टा और कंबोडिया शामिल हैं।

नोबेल शांति पुरस्कार के लिए हर साल नामांकन प्रक्रिया 1 फरवरी से शुरू होती है, और उसी दिन तक मिले नाम ही मान्य माने जाते हैं। 2025 के लिए नामांकन की आखिरी तारीख 31 जनवरी 2025 थी।

इस बार का परिणाम दर्शाता है कि वैश्विक शांति और मानवाधिकार के क्षेत्र में वास्तविक योगदान को प्राथमिकता दी गई।