उन्नाव रेप केस की सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट के बाहर हंगामा, ‘नारी न्याय’ के नारों के बीच महिला कार्यकर्ता हिरासत में

उन्नाव रेप केस की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले अदालत के बाहर महिला कार्यकर्ताओं का जोरदार प्रदर्शन। ‘नारी न्याय’ के नारे, अलका लांबा के आरोप और पुलिस की कार्रवाई ने माहौल गरमाया।

उन्नाव रेप केस की सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट के बाहर हंगामा, ‘नारी न्याय’ के नारों के बीच महिला कार्यकर्ता हिरासत में

उन्नाव रेप मामले में सुप्रीम कोर्ट की अहम सुनवाई से ठीक पहले देश की सबसे बड़ी अदालत के बाहर माहौल पूरी तरह गरमा गया। पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता सुप्रीम कोर्ट परिसर के बाहर जुटीं और जोरदार प्रदर्शन किया। इस विरोध में कांग्रेस की महिला कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आम महिलाएं भी शामिल रहीं, जिससे यह प्रदर्शन केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक स्वरूप भी लेता नजर आया।

सुरक्षा के नाम पर पुलिस की सख्त कार्रवाई
प्रदर्शन बढ़ता देख पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए सख्ती दिखाई और सभी महिला प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर मौके से हटा दिया। पुलिस कार्रवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के बाहर का इलाका कुछ समय के लिए पूरी तरह छावनी में तब्दील नजर आया। हिरासत में लिए जाने को लेकर प्रदर्शनकारी महिलाओं में नाराजगी साफ दिखी और उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी पर रोक बताया।

अलका लांबा ने लगाए पुलिस पर गंभीर आरोप
इसी बीच महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा भी उन्नाव पीड़िता के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें गाड़ी से उतरने तक की अनुमति नहीं दी। अलका लांबा का कहना था कि वे केवल पीड़िता के समर्थन में अपनी आवाज़ दर्ज कराने आई थीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें वहां रुकने नहीं दिया।

‘नारी न्याय’ के बैनर के साथ सड़क पर उतरीं महिलाएं
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने ‘नारी न्याय’ लिखे बैनर और बैज पहन रखे थे, जो इस आंदोलन का मुख्य प्रतीक बन गया। दिल्ली महिला कांग्रेस की अध्यक्ष पुष्पा सतबीर सिंह सड़क पर बैठकर विरोध जताती नजर आईं। हालांकि, पुलिस ने उन्हें भी अन्य महिला प्रदर्शनकारियों के साथ डिटेन कर बस में बैठा दिया, जिससे मौके पर तनाव और बढ़ गया।

पीड़िता को लेकर महिला अधिकार कार्यकर्ताओं की उम्मीद
महिला अधिकार कार्यकर्ता योगिता भयाना ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पीड़िता इस समय कोर्ट में मौजूद है और उसकी स्थिति ठीक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि न्यायपालिका से पीड़िता को न्याय जरूर मिलेगा। योगिता भयाना का कहना था कि यदि पहले दिया गया फैसला सही नहीं है, तो अदालत के पास उसे बदलने का पूरा अधिकार है।

कोर्टरूम के भीतर भी दिखी मामले की गंभीरता
वहीं, सुनवाई से पहले दोषी कुलदीप सिंह सेंगर की ओर से पक्ष रखते हुए उसके वकील शशि त्रिपाठी ने न्याय प्रणाली पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि देश की न्याय व्यवस्था मजबूत है और सभी को उस पर विश्वास बनाए रखना चाहिए। इस दौरान उन्नाव गैंगरेप केस की सुनवाई में CBI की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता भी कोर्टरूम में मौजूद रहे, जिससे मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता साफ झलकती है।