शिक्षा हुई महंगी! UP Board की किताबें 8 गुना महंगी, गरीबों की मुश्किलें बढ़ीं

यूपी बोर्ड ने कक्षा 9–12 की NCERT आधारित किताबों के दाम 8 गुना तक बढ़ा दिए। अब अभिभावकों को 700–900 रुपये तक खर्च करने पड़ेंगे। जानिए वजह और असर।

शिक्षा हुई महंगी! UP Board की किताबें 8 गुना महंगी, गरीबों की मुश्किलें बढ़ीं
प्रतीकात्मक तस्वीर

उत्तर प्रदेश बोर्ड (UP Board) से पढ़ने वाले लाखों छात्रों के अभिभावकों को इस बार बड़ा झटका लगा है। यूपी बोर्ड की कक्षा 9 से 12 तक की NCERT आधारित किताबों के दामों में इस साल आठ गुना तक वृद्धि कर दी गई है। किताबें महंगी होने से मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग (Low income group) के लिए बच्चों को पढ़ाना और मुश्किल हो गया है।

2018 के बाद यह पहला मौका है जब किताबों की कीमत में इतनी बड़ी बढ़ोतरी की गई। बोर्ड का दावा है कि किताबों की आपूर्ति सुनिश्चित करने और प्रकाशकों को आकर्षित करने के लिए यह कदम जरूरी था। लेकिन इसका सीधा असर गरीब अभिभावकों की जेब पर पड़ रहा है।

कितना बढ़ा खर्च?
अब तक 9वीं के छात्रों के लिए पूरी किताबें करीब 150 रुपये में मिल जाती थीं, लेकिन अब वही किताबें खरीदने के लिए 700 रुपये तक खर्च करने पड़ेंगे। 11वीं कक्षा के लिए यह खर्च 900 रुपये तक पहुंच जाएगा।

ग्रामीण इलाकों के किसान और दिहाड़ी मजदूर वर्ग के लोगों के लिए यह खर्च काफी बड़ा है। कई अभिभावक अब उधारी लेकर बच्चों की किताबें खरीदने को मजबूर हो सकते हैं।

क्यों बढ़ाए गए दाम?
यूपी बोर्ड ने अपनी किताबें इतनी सस्ती रखी थीं कि प्रकाशक घाटा बता कर इन्हें छापने से मना कर रहे थे। किताबों की कमी न हो और छात्रों को समय पर किताबें मिल सकें, इसके लिए प्रकाशकों और रिटेलर्स का कमीशन बढ़ाकर एनसीईआरटी के स्तर तक कर दिया गया। बोर्ड का कहना है कि किताबें अब NCERT aligned होंगी और शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी।

हालांकि, कुछ किताबों के दाम घटे भी हैं, जैसे:
- 12वीं की भौतिकी (पार्ट 1): 64 रुपये से घटकर 43 रुपये
- 11वीं की मनोविज्ञान: 28 रुपये से घटकर 10 रुपये

लेकिन जिन विषयों के छात्र ज्यादा संख्या में होते हैं, उन किताबों के दाम कई गुना बढ़ा दिए गए हैं।

अभिभावकों का दर्द
निम्न आय वर्ग के अभिभावक, जिनकी आमदनी 10,000 रुपये मासिक या उससे कम है, के लिए बच्चों को पढ़ाना अब पहले से कहीं ज्यादा महंगा हो गया है। ग्रामीण सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश छात्रों के अभिभावक अब कर्ज लेकर किताबें खरीदने पर मजबूर हो सकते हैं।