कोडीन कफ सिरप तस्करी केस: क़ानूनी शिकंजे में कब आएगा मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल? विपक्ष का सवाल- कहां सोई थी सरकार?

वाराणसी में कोडीन युक्त कफ सिरप तस्करी का बड़ा खुलासा। मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल फरार, अमित सिंह टाटा गिरफ्तार। एसटीएफ और SIT की जांच तेज, विपक्ष का सरकार पर हमला।

कोडीन कफ सिरप तस्करी केस: क़ानूनी शिकंजे में कब आएगा मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल? विपक्ष का सवाल- कहां सोई थी सरकार?

वाराणसी में कोडीन युक्त कफ सिरप की तस्करी का मामला सामने आते ही पूरा शहर सकते में है। लाखों की अवैध खेप पकड़े जाने के बाद यह खुलासा हुआ कि लंबे समय से करोड़ों रुपये का यह गैरकानूनी कारोबार बिना किसी की नज़र में आए फल-फूल रहा था। देश के आध्यात्मिक और प्रमुख संसदीय क्षेत्र में इतनी बड़ी तस्करी होने से प्रशासन और जनता दोनों हैरान हैं।

जांच में यह बात सामने आई है कि इस कफ सिरप की सप्लाई झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल से लेकर बांग्लादेश तक फैली हुई थी। यूपी एसटीएफ, स्थानीय पुलिस और ड्रग्स विभाग की संयुक्त कार्रवाई में कई अहम सुराग मिले हैं। इस मामले की परतें खोलने के लिए SIT भी बनाई गई है, जबकि एसटीएफ और ड्रग्स विभाग अलग-अलग स्तर पर जांच कर रहे हैं।

इस पूरे नेटवर्क में दो नाम तेजी से सुर्खियों में हैं—शुभम जायसवाल, जिसे इस गिरोह का मास्टरमाइंड माना जा रहा है, और उसका साथी अमित सिंह टाटा। कुछ दिन पहले यूपी एसटीएफ ने अमित सिंह टाटा को लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया है और उससे कई अहम जानकारियां निकलने की उम्मीद है।

राजनीतिक दिग्गजों से कनेक्शन की चर्चा तेज
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों के बाद यह भी चर्चा है कि आरोपियों के संपर्क कुछ बाहुबली नेताओं और प्रभावशाली लोगों से जुड़े हो सकते हैं। मामले की गंभीरता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि लगभग तीन दर्जन फर्मों की जांच चल रही है और एक दर्जन पर पहले ही मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।

SP का आरोप— असली खिलाड़ी परदा के पीछे
इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया है कि वाराणसी जैसे महत्वपूर्ण संसदीय क्षेत्र में वर्षों से चलता आ रहा यह अवैध व्यापार सत्ता संरक्षण के बिना संभव नहीं था। उनका कहना है कि जिनका नाम सामने आ रहा है वे सिर्फ मोहरे हैं, असली सरगना अभी सामने नहीं आया है।

कांग्रेस का सवाल—सरकार कहां सोई थी?
कांग्रेस नेता अजय राय ने भी सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए सवाल पूछा है कि इतने बड़े पैमाने पर तस्करी होती रही और सरकार को भनक क्यों नहीं लगी। कांग्रेस का कहना है कि यह सुरक्षा और निगरानी तंत्र की विफलता का बड़ा उदाहरण है। अब पूरे शहर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस इस पूरे खेल के सबसे बड़े खिलाड़ी को कब पकड़ पाती है।