लालू परिवार की सियासत में भूचाल! बिहार में एनडीए की आंधी, तेजस्वी–तेज प्रताप दोनों पटरी से उतरे
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए भारी बढ़त बनाते हुए आगे बढ़ रही है। वहीं लालू यादव के दोनों बेटे—तेजस्वी और तेज प्रताप—अपने-अपने सीटों पर पीछे चल रहे हैं। तेजस्वी राघोपुर में बीजेपी उम्मीदवार से पिछड़ रहे हैं, जबकि तेज प्रताप महुआ में चौथे नंबर पर हैं। चुनाव से पहले परिवारिक विवाद और राजनीतिक टूट ने आरजेडी को भारी नुकसान पहुंचाया है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की मतगणना अपने निर्णायक मोड़ पर है और शुरुआती रुझान बेहद चौंकाने वाले निकलकर सामने आ रहे हैं। एनडीए लगातार बड़ी बढ़त की ओर बढ़ रही है और स्थिति ऐसी बन गई है कि मुकाबला अब एनडीए के ही दो बड़े घटक—बीजेपी और जेडीयू—के बीच सबसे बड़ी पार्टी बनने को लेकर सिमट गया है। इस बार 2020 का परिदृश्य पूरी तरह उलट चुका है। पिछली बार सबसे बड़ी पार्टी रही आरजेडी इस बार तीसरे पायदान पर खिसक गई है।
तेजस्वी यादव राघोपुर में संघर्षरत
इन रुझानों ने आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। महागठबंधन की ओर से सीएम फेस घोषित तेजस्वी यादव अपनी परंपरागत सीट राघोपुर में कड़ी चुनौती झेलते दिख रहे हैं। सातवें राउंड तक वे बीजेपी उम्मीदवार सतीश यादव से पीछे चल रहे हैं। राघोपुर जैसी "सेफ सीट" पर इस तरह का संघर्ष उनके लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
तेज प्रताप यादव महुआ से चौंकाने वाली गिरावट पर
इधर महुआ सीट पर तस्वीर और भी निराशाजनक है। जेजेडी के निशान पर चुनाव लड़ रहे तेज प्रताप यादव चौथे नंबर पर खिसक चुके हैं। वोटिंग ट्रेंड्स इस ओर इशारा कर रहे हैं कि महुआ की जनता इस बार तेज प्रताप से न सिर्फ नाराज़ है, बल्कि उन्हें विकल्प के तौर पर भी स्वीकार करने में हिचक रही है।
2015 में राजनीति में एंट्री, लेकिन 2025 में परिवार और पार्टी दोनों टूटे
लालू यादव के दोनों बेटे—तेजस्वी और तेज प्रताप—ने 2015 में पिता की देखरेख में राजनीति में कदम रखा था। तेजस्वी राघोपुर और तेज प्रताप महुआ से पहली बार विधायक बने थे। उसी समय गठबंधन सरकार में तेज प्रताप को मंत्री और तेजस्वी को उप-मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली थी। हालांकि, यह सरकार दो साल भी नहीं टिक सकी और लालू परिवार विपक्ष में पहुंच गया।
2020 में वापसी, लेकिन सत्ता का सुख अल्पकालिक
2020 के चुनाव में एक बार फिर दोनों भाई जीतकर विधानसभा पहुंचे—तेजस्वी राघोपुर से और तेज प्रताप हसनपुर से। बाद में नीतीश कुमार के गठबंधन फेरबदल में दोनों को फिर सत्ता में शामिल होने का मौका मिला। हालांकि, यह सत्ता भी लंबे समय तक नहीं टिक पाई और राजनीतिक अस्थिरता ने आरजेडी के समीकरण लगातार बिगाड़े।
चुनाव से पहले परिवारिक विवाद बना बड़ा फैक्टर
2025 के चुनाव से पहले लालू परिवार के भीतर बड़ा बवंडर देखने को मिला। तेज प्रताप को उनके निजी विवादों और व्यवहार को लेकर न केवल पार्टी बल्कि परिवार से भी बाहर का रास्ता दिखाया गया। इसके बाद उन्होंने अपनी अलग पार्टी बनाकर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया, जिसने सियासी समीकरणों को और उलझा दिया।
तेज प्रताप ने आरोप लगाया कि तेजस्वी के सबसे करीबी सलाहकार संजय यादव ने उनकी छवि खराब करने और उन्हें पार्टी से हटवाने में बड़ी भूमिका निभाई। इसके बाद तेज प्रताप लगातार तेजस्वी के खिलाफ बयान देते रहे और चुनावी मैदान में भी उनके लिए चुनौती खड़ी करते दिखे।
जनता पर गलत संदेश, दोनों को नुकसान
हालांकि तेज प्रताप की नई पार्टी को रुझानों में खास सफलता मिलती नहीं दिख रही है, लेकिन जनता के बीच लालू परिवार की कलह ने गलत संदेश जरूर भेज दिया। यही वजह है कि इस बार दोनों भाइयों को इसका राजनीतिक नुकसान स्पष्ट नजर आ रहा है।


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