पत्रकारों पर FIR से उठे सवाल: वाराणसी के वकीलों और प्रेस क्लब का विरोध, योगी सरकार से कार्रवाई की मांग
वाराणसी में पत्रकारों पर लंका थाने की FIR के खिलाफ प्रेस क्लब व बार काउंसिल के सदस्यों ने विरोध जताया। FIR समाप्त करने की माँग तेज़।
वाराणसी में लंका थाने द्वारा छह पत्रकारों पर दर्ज की गई FIR को लेकर शहर में जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इसे पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए न केवल प्रेस जगत बल्कि विधिक बिरादरी के प्रमुख चेहरों ने भी इस कार्रवाई की निंदा की है।
वाराणसी प्रेस क्लब के महामंत्री अशोक कुमार मिश्र 'क्लाउन' ने FIR को बिना शर्त समाप्त करने" की माँग करते हुए कहा कि यह पूरा मामला पत्रकारों की भूमिका को दबाने की कोशिश है। वहीं बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सदस्य हरिशंकर सिंह ने कहा, "यह मुकदमा पूरी तरह से ग़लत है। पत्रकार समाज का आइना होते हैं, उन पर केस दर्ज कराना अभिव्यक्ति की आज़ादी पर प्रहार है।
इसके अलावा बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य श्रीनाथ त्रिपाठी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील करते हुए कहा, योगी जी से विनम्र निवेदन है कि अपने पुलिस महकमे को समझाएँ कि वे लोकतंत्र की आत्मा को चोट न पहुँचाएँ।
बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के एक अन्य सदस्य अरुण कुमार त्रिपाठी ने पत्रकारों के कार्य की सराहना करते हुए कहा, उन सभी 6 पत्रकार बंधुओं को धन्यवाद, जिन्होंने इस प्रकार के कृत्य को उजागर किया।
बनारस बार एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष अनुज यादव ने भी माँग की कि, पत्रकारों पर की गई FIR को एक्सपंज (Expunge) किया जाए। वरिष्ठ अधिवक्ता धीरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा, यह FIR पुलिस की नाकामी का प्रतीक है, जो अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़ रही है और पत्रकारों को निशाना बना रही है।
वाराणसी प्रेस क्लब के अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने बेहद मुखर होकर कहा, ऐसे 100 'अपराध' हम दिन में करने को तैयार हैं, जो जनता की सच्चाई सामने लाएं। यह FIR हम सबको नहीं डरा सकती।
इस पूरे मामले ने स्पष्ट कर दिया है कि पत्रकारिता को दबाने की कोशिशों का विरोध केवल मीडिया संस्थानों तक सीमित नहीं, बल्कि न्यायिक समुदाय भी इस लड़ाई में उनके साथ खड़ा है। यदि जल्द ही इस FIR को वापस नहीं लिया गया, तो यह आंदोलन और तेज़ हो सकता है।
मालवीय जी की मूर्ति सफाई का वीडियो बना 'विवाद का कारण'
लंका थाना क्षेत्र में तैनात उप निरीक्षक (SI) अभिषेक कुमार सिंह द्वारा शहर के 6 पत्रकारों के खिलाफ दो प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं। यह कार्रवाई उस वीडियो को लेकर की गई है जिसमें कुछ युवक महामना मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा की सफाई करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
क्या है मामला?
FIR के अनुसार, पत्रकारों ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर "तोड़-मरोड़" कर प्रसारित किया, जिससे समाज में जातिगत वैमनस्य, अफवाह और कानून-व्यवस्था भंग होने की स्थिति पैदा हुई। शिकायत में आरोप है कि वीडियो का उद्देश्य लोगों को भड़काना और द्वेष फैलाना था।
किस पर FIR?
इन पत्रकारों पर दर्ज की गई एफआईआर में जिन लोगों को नामजद किया गया है, वे हैं:
- अरशद आलम (व्हाट्सएप ग्रुप ‘खबर बनारस’ के एडमिन)
- अभिषेक झा (NBT ऑनलाइन)
- अभिषेक त्रिपाठी (हिन्दुस्तान)
- सोनू सिंह (दैनिक जागरण)
- शैलेश चौरसिया (टीवी पत्रकार)
- नितिन कुमार राय (स्वतंत्र पत्रकार)
इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356(3) (साम्प्रदायिक विद्वेष फैलाना), 196(1) (अफवाह फैलाना), और आईटी एक्ट की धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है।
सरकारी पक्ष का क्या कहना है?
सूचना विभाग की ओर से जारी बयान के अनुसार, लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिशासी अभियंता के.के. सिंह ने स्पष्ट किया कि महामना मदन मोहन मालवीय की मूर्ति की सफाई नियमित प्रक्रिया के तहत हो रही थी। यह कार्य PWD के ठेकेदारों द्वारा नियमित धूल हटाने के लिए किया गया था। उन्होंने यह भी जोड़ा कि मूर्ति पर चढ़कर सफाई करने की कुछ मीडिया रिपोर्ट्स भ्रामक और तथ्यहीन हैं।
क्या है विवाद की जड़?
इस पूरे मामले की शुरुआत उस वीडियो से हुई जिसमें मजदूर महामना की मूर्ति पर चढ़कर सफाई करते नजर आए। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में इसे "अपमानजनक" बताया गया, और यहीं से विवाद की चिंगारी भड़की। पुलिस का मानना है कि इन पोस्ट्स ने स्थिति को संवेदनशील बना दिया।


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