UP में नए BJP प्रदेश अध्यक्ष की हलचल तेज, ओबीसी चेहरा बनने की अटकलें तेज हुईं
उत्तर प्रदेश BJP में नए प्रदेश अध्यक्ष की खोज तेज। 13 दिसंबर को नामांकन, 16 से पहले ऐलान संभव। ओबीसी नेता को कमान मिलने की अटकलें तेज।
उत्तर प्रदेश BJP में नए अध्यक्ष के चयन को लेकर गतिविधियां अचानक तेज हो गई हैं। गुरुवार शाम दिल्ली में हुई अहम बैठक ने संकेत साफ कर दिया कि पार्टी जल्द ही नया चेहरा घोषित कर सकती है। इस बैठक में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने संगठनात्मक समीकरणों पर विस्तार से चर्चा की। पार्टी सूत्र बताते हैं कि विनोद तावड़े की मौजूदगी में 13 दिसंबर को नामांकन प्रक्रिया पूरी की जाएगी और 16 दिसंबर से पहले नए अध्यक्ष की घोषणा संभव है।
भूपेंद्र चौधरी की मुलाकात ने बढ़ाई अटकलें
सूत्रों के अनुसार मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर पूरा रिपोर्ट कार्ड सौंपा है। इसके बाद केंद्रीय स्तर पर अध्यक्ष चयन की प्रक्रिया लगभग अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। अनुमान यही है कि पार्टी दिसंबर के मध्य तक नए अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपकर चुनावी रणनीति को गति देगी।
पीयूष गोयल के दौरे से अंतिम फैसला तय माना जा रहा है
संगठन स्तर पर मिल रही जानकारी के अनुसार राज्य के चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल इस वीकेंड लखनऊ पहुंच सकते हैं। माना जा रहा है कि वे अंतिम औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद नए अध्यक्ष के नाम पर मुहर लगाएंगे। पार्टी पूरी कोशिश कर रही है कि संगठनात्मक तैयारी को चुनावी जोश में बदला जाए और बदले राजनीतिक माहौल में मजबूत संदेश दिया जा सके।
13 दिसंबर को नामांकन, 16 से पहले बड़ा ऐलान
नामांकन प्रक्रिया को लेकर भी स्पष्ट इशारा दिया गया है कि 13 दिसंबर को विनोद तावड़े की मौजूदगी में उम्मीदवार अपना नाम दर्ज करेंगे। यदि एक से अधिक नाम आए तो चुनाव कराया जाएगा, जबकि एक ही नामांकन होने पर अगले दिन पीयूष गोयल औपचारिक रूप से नए अध्यक्ष की घोषणा कर देंगे।
BL Verma, धर्मपाल सिंह और पंकज चौधरी के नाम टॉप पर
इस बार पार्टी संगठन की कमान किसी ओबीसी नेता को सौंपने की तैयारी में दिख रही है। सूत्रों का दावा है कि केंद्रीय मंत्री बी. एल. वर्मा, योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी — तीनों ही नाम बेहद गंभीरता से चर्चा में हैं। भाजपा का मानना है कि ओबीसी नेतृत्व को आगे रखकर वह गैर-यादव वोटबैंक में अपनी पकड़ और मजबूत कर सकती है।
OBC कार्ड से चुनावी मैदान में बढ़त हासिल करने की रणनीति
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यूपी की सामाजिक संरचना को देखते हुए आगामी चुनावों में ओबीसी चेहरा पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक निवेश साबित हो सकता है। गैर-यादव ओबीसी वर्ग में भाजपा की बढ़ती स्वीकार्यता को और मजबूत करने के लिए यह कदम बेहद रणनीतिक माना जा रहा है। चुनावी मौसम नजदीक है और संगठन की बागडोर किसे मिलेगी, इस पर अब सभी की निगाहें टिक गई हैं।


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