25 साल, एक ही चेहरा: आखिर क्यों रूस में अजेय बने हुए हैं व्लादिमीर पुतिन

25 साल से रूस की सत्ता पर काबिज व्लादिमीर पुतिन आखिर बार-बार चुनाव कैसे जीत रहे हैं? जानिए पुतिन के बताए वो 4 शक्तिशाली फॉर्मूले, जो उन्हें दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं में बनाए हुए हैं।

25 साल, एक ही चेहरा: आखिर क्यों रूस में अजेय बने हुए हैं व्लादिमीर पुतिन
Vladimir Putin

करीब ढाई दशक से रूस की सत्ता पर व्लादिमीर पुतिन का कब्जा है। इस दौरान देश में कई विपक्षी नेता उभरे, कई आंदोलन हुए, लेकिन कोई भी नेता पुतिन को हिला नहीं पाया। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में 88 प्रतिशत वोट मिलना इस बात का बड़ा सबूत है कि आज भी रूसी जनता का भरोसा पुतिन के साथ है। किसी सुपरपावर देश में इतनी लंबी राजनीतिक पकड़ अपने आप में एक मिसाल है, और इसी वजह से पूरी दुनिया यह जानना चाहती है कि आखिर उनकी सफलता का राज क्या है।

‘काम से पीछे हटना मेरे लिए विकल्प नहीं’ – पुतिन का पहला सूत्र
हाल ही में एक टीवी इंटरव्यू में पुतिन ने अपनी इस अभूतपूर्व सफलता को लेकर चार ऐसे सिद्धांत बताए, जिन्हें वे हर परिस्थिति में अपनाते हैं। पुतिन का कहना है कि वे उस काम को हमेशा करते हैं, जिसे टालने का उनके पास कोई नैतिक अधिकार नहीं होता। उनके अनुसार काम न करने का कोई बहाना कभी सही नहीं होता। यही सोच उन्हें हर दिन आगे बढ़ने की ताकत देती है और उनकी कार्यशैली की नींव भी यही है।

अतीत नहीं, सिर्फ भविष्य – पुतिन का दूसरा फॉर्मूला
पुतिन का दूसरा बड़ा सिद्धांत है – कभी पीछे मुड़कर न देखना। वे अतीत को लेकर पछतावा करने में विश्वास नहीं रखते। उनका कहना है कि अगर यह सोचते रहें कि पहले क्या कर लेते तो बेहतर होता, तो आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है। इसलिए वे सिर्फ वर्तमान और भविष्य पर फोकस करते हैं। यही कारण है कि रूस की नीतियों में अक्सर तेजी और आक्रामकता दिखती है, चाहे वह विदेश नीति हो या सैन्य रणनीति।

केजीबी बैकग्राउंड और हर पल की चौकसी
पुतिन की सतर्कता उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। राजनीति में आने से पहले वे केजीबी के एजेंट रह चुके हैं और यही अनुभव आज भी उनके फैसलों में झलकता है। वे खुद स्वीकार करते हैं कि उन्हें हमेशा यह अंदाजा रहता है कि कौन क्या कर रहा है। वे खुद भी हर मोर्चे पर एक्टिव रहते हैं और किसी भी तरह की ढील देने के पक्ष में नहीं हैं। यही वजह है कि उनके विरोधी अक्सर उनसे एक कदम पीछे ही नजर आते हैं।

अकेले बैठकर भी पांच घंटे की कूटनीति
मेहनत के मामले में भी पुतिन खुद को सबसे आगे रखते हैं। उन्होंने इंटरव्यू में यह भी बताया कि हाल ही में अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ के साथ उनकी करीब पांच घंटे तक लगातार बैठक चली। उस बैठक में सामने की ओर तीन लोग थे, जबकि वे अकेले बैठे थे। इसके बावजूद उन्होंने बातचीत को पूरी गंभीरता से संभाला। यह उदाहरण बताता है कि पुतिन सत्ता को सिर्फ पद नहीं बल्कि जिम्मेदारी मानते हैं।

जीवन भर की सत्ता, युद्ध और नए वैश्विक गठबंधन
73 साल की उम्र में भी पुतिन रूस की राजनीति के केंद्र में हैं। मौजूदा व्यवस्था के तहत वे आजीवन राष्ट्रपति बने रह सकते हैं और अपने उत्तराधिकारी को चुनने का अधिकार भी रखते हैं। उनके कार्यकाल में रूस ने न सिर्फ अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार किया, बल्कि यूक्रेन के कई क्षेत्रों पर कब्जा भी जमाया। इसके साथ ही चीन और उत्तर कोरिया जैसे देशों के साथ रूस के रिश्ते पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुए हैं। उत्तर कोरिया तो आज खुलकर रूस के साथ युद्ध में खड़ा नजर आता है।

क्यों आज भी दुनिया में पुतिन सबसे ताकतवर नेताओं में गिने जाते हैं?
कुल मिलाकर देखा जाए तो पुतिन की सफलता किसी एक वजह से नहीं, बल्कि उनकी कार्यशैली, मानसिकता, सतर्कता और अथक मेहनत का नतीजा है। उनके बताए चार सिद्धांत यह साफ करते हैं कि वे सत्ता को सिर्फ भोगने की नहीं, बल्कि उसे निभाने की जिम्मेदारी मानते हैं। शायद यही कारण है कि तमाम विरोधों, प्रतिबंधों और युद्धों के बावजूद वे आज भी रूस की राजनीति में सबसे ताकतवर चेहरा बने हुए हैं।