परमाणु शक्ति की होड़: भारत-पाकिस्तान से आगे, लेकिन चीन की चुनौती बरकरार

जानें भारत, पाकिस्तान और चीन के परमाणु शस्त्रागार की स्थिति। SIPRI इयरबुक 2025 के अनुसार, भारत ने परमाणु हथियारों में विस्तार किया है, जबकि चीन ने तेजी से अपना शस्त्रागार मजबूत किया है। पाकिस्तान अपनी क्षमताओं को संतुलित बनाए रखने में जुटा है।

परमाणु शक्ति की होड़: भारत-पाकिस्तान से आगे, लेकिन चीन की चुनौती बरकरार
India Nuclear Weapons

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) द्वारा जारी 'SIPRI इयरबुक 2025' में परमाणु हथियारों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 तक भारत के पास 180 परमाणु हथियार हैं, जबकि पाकिस्तान के पास 170 और चीन के पास 600 हथियार हैं। चीन का शस्त्रागार भारत और पाकिस्तान दोनों से कई गुना अधिक है और इसमें 24 हथियार ऐसे हैं जो सक्रिय रूप से तैनात हैं।

रूस और अमेरिका के पास अधिकांश हथियार हैं, लेकिन चीन ने हाल ही में शांतिकाल में भी मिसाइलों पर कुछ हथियार तैनात करना शुरू कर दिया है।

भारत की रणनीति और विस्तार
भारत ने 2024 में अपने परमाणु शस्त्रागार में विस्तार किया और नई परमाणु वितरण प्रणालियों का विकास जारी रखा। इसका उद्देश्य अपने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा हितों की रक्षा करना है।

चीन की परमाणु नीति: तेजी से विकास
चीन का शस्त्रागार किसी भी देश की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है। 2023 के बाद से हर साल लगभग 100 नए हथियार जोड़े गए। जनवरी 2025 तक:

- 350 नए ICBM साइलो तैयार किए गए।
- उत्तर और पूर्वी क्षेत्रों में निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।

चीन की नीति न्यूनतम प्रतिरोध की है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि इसका उद्देश्य विश्वस्तरीय सैन्य शक्ति बनना है।

पाकिस्तान: भारत के मुकाबले कम परंतु सतर्क
पाकिस्तान अपने परमाणु शस्त्रागार को आधुनिक बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। हालांकि, भारत के मुकाबले उसकी क्षमता कम है, लेकिन उसके परमाणु हथियार क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं।

वैश्विक परमाणु हथियारों की भविष्यवाणी
शीत युद्ध के बाद से रूस और अमेरिका ने पुराने हथियार नष्ट किए, लेकिन अब नई तैनाती की गति तेज हो रही है। SIPRI ने चेतावनी दी है कि वैश्विक परमाणु हथियारों की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है।