बिहार चुनाव 2025: चिराग पासवान को एनडीए में मिली 29 सीटें, लेकिन मनपसंद सीटों पर होगी सियासी जंग

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए एनडीए में सीट बंटवारे का ऐलान, चिराग पासवान की एलजेपी को 29 सीटें मिलीं। जानें कौन-कौन सी सीटों पर होगी सियासी जंग और चिराग का बढ़ता कद।

बिहार चुनाव 2025: चिराग पासवान को एनडीए में मिली 29 सीटें, लेकिन मनपसंद सीटों पर होगी सियासी जंग
Chirag paswan

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए एनडीए में सीट बंटवारा रविवार को तय कर दिया गया। इस फॉर्मूले के तहत बीजेपी और जेडीयू के बीच बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने का निर्णय हुआ, जिससे चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी (रामविलास) को कुल 29 सीटें मिलीं। चिराग की ओर से शुरू से ही 30-35 सीटों की मांग की जा रही थी, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व के मध्यस्थता के बाद 29 सीटों पर समझौता हुआ।

चिराग पासवान का कद और राजनीतिक महत्व
चिराग पासवान को अब बिहार की राजनीति में एक ‘किंगमेकर’ के रूप में देखा जा रहा है। उनके पिता, रामविलास पासवान की सियासी विरासत और दलित वोट बैंक, खासकर दुसाध समुदाय में गहरी जड़ें, उनके राजनीतिक वजन को बढ़ाती हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में पांच में से पांच सीटें जीतकर चिराग ने अपनी संगठन क्षमता और जनाधार का प्रमाण दिया।

मनपसंद सीटों पर सियासी जंग
हालांकि चिराग को कुल सीटों की संख्या मिल गई, लेकिन अभी यह तय नहीं हुआ कि वह कौन-कौन सी सीटें लड़ेगें। अधिकांश सीटें वे जगहें हैं जहां बीजेपी, जेडीयू और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा का प्रभाव मजबूत है। एनडीए में यह सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा बन सकता है कि क्या जेडीयू और बीजेपी अपनी पुरानी जीत की सीटों को एलजेपी के लिए छोड़ेंगे।

4 सीटें बीजेपी के कब्ज़े में
3 सीटें जेडीयू के अधीन
1 सीट जीतनराम मांझी की पार्टी के पास

इस पर राजनीतिक समीकरण और गठबंधन के अंदरूनी राजनीति का असर देखा जाएगा।

एलजेपी और एनडीए का सामाजिक समीकरण
बीजेपी के पास बिहार में शहरी और सवर्ण वोट बैंक है, जबकि जेडीयू कुर्मी और पिछड़े वर्ग के वोटरों पर निर्भर है। चिराग की पार्टी दलित वोट बैंक जोड़कर गठबंधन की सामाजिक पकड़ को मजबूत करती है। यही वजह है कि एनडीए ने उन्हें 29 सीटें देने के साथ-साथ महत्वपूर्ण चुनावी रणनीति में सहयोगी नहीं, बल्कि मुख्य खिलाड़ी के तौर पर स्वीकार किया है।

2020 और 2025 की तुलना
2020 के विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान एनडीए से बाहर थे और उनकी पार्टी ने 135 सीटों पर चुनाव लड़ा, जिसमें सिर्फ़ 1 सीट जीत पाई। उस चुनाव के परिणाम ने नीतीश कुमार और एनडीए को यह समझा दिया कि चिराग की पार्टी का असर कितना महत्वपूर्ण है।

2025 में रणनीति पूरी तरह बदल गई है:
एनडीए के साथ गठबंधन में
29 सीटों पर चुनाव
दलित और पिछड़े वोटरों पर केंद्रित योजना

इस बार चिराग का लक्ष्य सिर्फ़ सीट जीतना नहीं, बल्कि बिहार की अगली पीढ़ी के प्रमुख नेता के रूप में अपनी पहचान बनाना है।

चुनावी भविष्य और सियासी महत्व
चिराग पासवान का एनडीए में बढ़ता प्रभाव बिहार की राजनीति में नई दिशा तय कर सकता है। उनके पास दलित वोट बैंक की ताक़त है, जो गठबंधन की जीत में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। चुनाव परिणाम के बाद यह देखा जाएगा कि चिराग अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को कितनी रोशनी देते हैं और एनडीए के लिए कितने फायदे में साबित होते हैं।