बिहार के 'वायरल मंत्री’ दीपक प्रकाश: सादगी से मिली पहचान, बेबाक जवाबों ने बनाया सोशल मीडिया का चहीता चेहरा

बिहार के ‘वायरल मंत्री’ बने दीपक प्रकाश अपने साधारण पहनावे और बेबाक अंदाज से सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। एबीपी से बातचीत में उन्होंने राजनीति, मंत्री पद की जिम्मेदारियों, सादगी की राजनीति और परिवारवाद के आरोपों पर खुलकर बात की। पढ़ें पूरा विस्तृत रिपोर्ट।

बिहार के 'वायरल मंत्री’ दीपक प्रकाश: सादगी से मिली पहचान, बेबाक जवाबों ने बनाया सोशल मीडिया का चहीता चेहरा

बिहार की नई सरकार में मंत्री बनते ही उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश अचानक सोशल मीडिया की सुर्खियों में आ गए। वजह सिर्फ उनका पद नहीं, बल्कि उनका बेहद साधारण पहनावा और जमीन से जुड़ा व्यवहार था, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया। यही कारण है कि इंटरनेट पर उन्हें अब “वायरल मंत्री” कहा जा रहा है।

सादगी बनी पहचान
एबीपी को दिए गए इंटरव्यू में दीपक प्रकाश ने अपनी राजनीति, सोच और भविष्य की भूमिका पर खुलकर बात की। उन्होंने साफ कहा कि यह सफर उनके लिए बिल्कुल नया नहीं है, क्योंकि बचपन से ही पिता उपेंद्र कुशवाहा को जनता के बीच काम करते हुए देखते आए हैं। उनके मुताबिक, मंत्री पद मिलना सिर्फ सम्मान नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जैसे नेताओं के साथ काम करने का अवसर मिलना किसी भी युवा नेता के लिए प्रेरणा की बात है।

पहली जिम्मेदारी, बड़ा भरोसा
दीपक ने बताया कि मंत्री बनाए जाने की जानकारी उन्हें एक पारिवारिक बैठक में मिली, जिसे उनके पिता ने बुलाया था। उन्होंने कहा कि यह भरोसा उन्हें और ज्यादा मेहनत करने की प्रेरणा देता है।

परिवार से मिली सूचना
जब उनसे पूछा गया कि उनका साधारण पहनावा क्यों वायरल हो रहा है, तो दीपक प्रकाश का जवाब साफ था— राजनीति को बदलना होगा। युवा पुराने ढर्रे से दूर हो रहे हैं। अगर नेता भी उनसे दूरी बनाए रखेंगे तो राजनीति में नई ऊर्जा कैसे आएगी। उन्होंने कहा कि वे खुद को जनता से अलग नहीं रखना चाहते। वे चाहते हैं लोग उनसे सहजता से मिलें, बात करें और उन्हें अपना समझें।

सादगी और बदलाव की राजनीति
परिवारवाद के सवाल पर भी दीपक ने खुलकर प्रतिक्रिया दी। पत्रकार ने पूछा कि जब उनके पिता राज्यसभा सांसद हैं और उनकी मां विधायक, तो क्या यह परिवारवाद नहीं है। इसपर दीपक ने कहा— मेरी नियुक्ति को परिवारवाद से मत जोड़िए। मेरी क्षमता और योग्यता के आधार पर ही मुझे जिम्मेदारी मिली है। मैं यह साबित करूंगा कि भरोसा मुझ पर सही जगह लगाया गया है।