BRICS समिट 2025: भारत के लिए क्यों अहम है PM मोदी की विदेश यात्रा?

जानिए BRICS Summit 2025 भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है। PM मोदी की इस विदेश यात्रा से भारत को कैसे कूटनीतिक और आर्थिक फायदे होंगे। BRICS का विस्तार और इसके लक्ष्य।

BRICS समिट 2025: भारत के लिए क्यों अहम है PM मोदी की विदेश यात्रा?
pm modi in brics summit 2025

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों अपनी पांच देशों की विदेश यात्रा पर हैं। घाना, त्रिनिदाद एंड टोबेगो और अर्जेंटीना के बाद वे अब ब्राजील पहुंच चुके हैं, जहां वे ब्रिक्स समिट 2025 (BRICS Summit 2025) में हिस्सा लेंगे।

भारत की वैश्विक रणनीति और आर्थिक कूटनीति के लिहाज से यह यात्रा बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आइए विस्तार से समझते हैं कि ब्रिक्स क्या है, भारत के लिए यह कितना अहम है और इस मंच से भारत को क्या फायदे हैं।

क्या है BRICS? 
BRICS दुनिया की पांच प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है — Brazil, Russia, India, China और South Africa।
इसका नाम सबसे पहले साल 2001 में अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने सुझाया। 2006 में इसे औपचारिक रूप से स्थापित किया गया और पहला शिखर सम्मेलन 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में हुआ। 2010 में दक्षिण अफ्रीका इसके साथ जुड़ा और नाम हुआ — BRICS।

BRICS का विस्तार 
साल 2024 में संगठन का विस्तार हुआ और सऊदी अरब, मिस्र, ईरान, इथियोपिया और UAE इसके सदस्य बने।
- 2025 में इंडोनेशिया भी शामिल हो गया।
- अब मलेशिया, थाईलैंड, कजाखस्तान जैसे कई अन्य देश इससे जुड़ चुके हैं।
- आज BRICS के सदस्य देश दुनिया की लगभग 40% आबादी और 30% GDP का प्रतिनिधित्व करते हैं।

भारत के लिए BRICS क्यों है जरूरी?
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मौजूदगी से भारत अपनी अंतरराष्ट्रीय भूमिका को और मजबूत कर रहा है। भारत के लिए यह मंच बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था (Multipolar World) के अपने विज़न को आगे बढ़ाने का अवसर है। 

भारत की नीतियां — आतंकवाद के खिलाफ, ऊर्जा सुरक्षा, क्लाइमेट चेंज और समावेशी व्यापार — BRICS के एजेंडे से मेल खाती हैं। BRICS भारत को पश्चिमी देशों के दबदबे से अलग अपनी स्वतंत्र और तटस्थ छवि बनाए रखने का मौका देता है।

आर्थिक फायदे 
- ब्रिक्स के जरिए भारत अपनी आर्थिक कूटनीति (Economic Diplomacy) को मजबूत कर रहा है।
- डॉलर पर निर्भरता घटाने और स्थानीय करेंसी में व्यापार को बढ़ावा देने की पहल BRICS के जरिए संभव हो रही है।
- UPI जैसी डिजिटल भुगतान प्रणालियों को BRICS के स्तर पर बढ़ावा मिला है।
- दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation) और विकासशील देशों के साथ मजबूत रिश्ते बनाने का यह एक बड़ा प्लेटफॉर्म है।

इस बार की BRICS समिट क्यों खास है?
भारत को अगला BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। मौजूदा भू-राजनीतिक हालात — रूस-यूक्रेन युद्ध, इजरायल-गाजा संघर्ष, पश्चिम एशिया में तनाव — इस सम्मेलन के एजेंडे में होंगे। आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति को BRICS घोषणापत्र में जगह मिलने की संभावना है। अमेरिका की नीतियों, टैरिफ्स की भी आलोचना हो सकती है, लेकिन बयान संतुलित रहने की उम्मीद है।