सावन में क्यों नहीं होते शादी और मांगलिक कार्य? जानें पवित्र होने पर भी क्यों होते हैं वर्जित

सावन के पवित्र महीने में शादी और अन्य शुभ कार्य क्यों नहीं होते? जानें धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास, भगवान विष्णु की योग निद्रा और भगवान शिव की भूमिका के कारण। पढ़ें सावन 2025 की पूरी जानकारी।

सावन में क्यों नहीं होते शादी और मांगलिक कार्य? जानें पवित्र होने पर भी क्यों होते हैं वर्जित
प्रतीकात्मक तस्वीर

हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ और पवित्र माना जाता है। इस माह में भक्त पूरी श्रद्धा से शिवलिंग पर जलाभिषेक, व्रत और रुद्राभिषेक करते हैं। मान्यता है कि जो व्यक्ति सावन में सच्चे मन से महादेव की पूजा करता है, उसे सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। इस साल 11 जुलाई 2025 से सावन की शुरुआत के साथ ही शिव भक्तों में उत्साह का माहौल दिख रहा है।

शादी-विवाह में क्यों जरूरी है विष्णु जी का आशीर्वाद?
सावन भले ही बेहद पावन हो, लेकिन इस महीने में शादी और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। इसका मुख्य कारण यह है कि सावन का महीना चातुर्मास के दौरान आता है। चातुर्मास में भगवान विष्णु क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाते हैं।

धार्मिक मान्यता है कि विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों में भगवान विष्णु का जाग्रत होना और आशीर्वाद आवश्यक होता है। क्योंकि शादी के दौरान विवाह संस्कार में विष्णु मंत्रों का जाप और आह्वान होता है। ऐसे में जब वे योग निद्रा में होते हैं, तो विवाह करना वर्जित माना जाता है।

शिव जी शादी में क्यों नहीं होते सहभागी?
सावन भगवान शिव का महीना माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, भोलेनाथ का ध्यान और तप इस माह में चरम पर होता है। वे शादी जैसे मांगलिक कार्यों में सहभागी नहीं होते। इसलिए भी सावन में शादी और अन्य शुभ कार्य टाल दिए जाते हैं।

सावन में किन-किन कार्यों की होती है मनाही?
सिर्फ शादी ही नहीं, बल्कि इस महीने में कई अन्य मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं। इनमें शामिल हैं:
- मुंडन संस्कार
- जनेऊ संस्कार
- गृह प्रवेश
- नामकरण
- भूमि पूजन आदि।