Iran-US युद्ध का असर: भारत में LPG सप्लाई पर दबाव, सरकार ने उठाए बड़े कदम
होरमुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने एलपीजी, पीएनजी और सीएनजी की आपूर्ति सुरक्षित रखने के लिए आपात कदम उठाए हैं. घरेलू रसोई गैस को प्राथमिकता दी गई है और रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं.
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी दिखने लगा है. इसी आशंका को देखते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश में रसोई गैस की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कई अहम फैसले किए हैं. सरकार ने तेल रिफाइनरियों को एलपीजी का उत्पादन बढ़ाने और इस अतिरिक्त उत्पादन को घरेलू उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं, ताकि वैश्विक संकट के बीच आम लोगों की रसोई पर कोई असर न पड़े.
घरेलू उपभोक्ताओं को मिली प्राथमिकता
सरकार ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा परिस्थितियों में सबसे पहले घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी. इसी उद्देश्य से गैस सिलेंडर की बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिन का अंतर रखने का नियम लागू किया गया है. इस कदम का मकसद गैस की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकना है, ताकि हर घर तक नियमित रूप से गैस पहुंचती रहे.
जरूरी सेवाओं के लिए सुरक्षित आयातित गैस
सरकार ने आयातित एलपीजी का इस्तेमाल भी जरूरत के हिसाब से तय किया है. अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे आवश्यक गैर-घरेलू उपयोगकर्ताओं के लिए आयातित गैस को सुरक्षित रखा जा रहा है. इससे जरूरी सेवाओं में गैस की कमी न हो और व्यवस्था सुचारु रूप से चलती रहे.
आपात कानून के तहत गैस आपूर्ति नियंत्रण
ऊर्जा आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की शक्तियों का इस्तेमाल किया है. इसके तहत पेट्रोलियम उत्पादों और प्राकृतिक गैस की उपलब्धता तथा वितरण को प्राथमिकता के आधार पर नियंत्रित किया जा रहा है. योजना यह है कि अगर गैस की कमी होती है तो सबसे पहले घरों में पीएनजी और वाहनों के लिए सीएनजी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए. इसके बाद खाद कारखानों और उद्योगों को गैस उपलब्ध कराई जाएगी.
गैस खपत में आयात पर भारी निर्भरता
भारत की गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है. वर्ष 2024-25 में देश में लगभग 31.3 मिलियन टन एलपीजी की खपत हुई, जबकि घरेलू उत्पादन करीब 12.8 मिलियन टन ही रहा. यानी बड़ी मात्रा में गैस विदेशों से मंगानी पड़ती है, जिसका अधिकांश हिस्सा खाड़ी देशों से आता है.
होरमुज संकट से वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण Strait of Hormuz का समुद्री रास्ता बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है। यह वही रास्ता है, जिसके जरिए खाड़ी देशों से दुनिया के कई देशों तक तेल और गैस पहुंचती है। इसी वजह से तेल बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है और कई देशों ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित रखने के लिए एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं.
उद्योगों की गैस मांग पर नजर रखने को समिति
स्थिति की निगरानी के लिए तेल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति भी बनाई गई है. यह समिति रेस्टोरेंट, होटल और अन्य उद्योगों की गैस मांग की समीक्षा करेगी और यह तय करेगी कि सीमित संसाधनों के बीच गैस का वितरण कैसे संतुलित तरीके से किया जाए.
वैश्विक संकट के बीच देश में गैस आपूर्ति सुरक्षित रखने की कोशिश
सरकार का कहना है कि इन सभी कदमों का उद्देश्य यही है कि अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद भारत में घरेलू रसोई और जरूरी सेवाओं तक गैस की आपूर्ति बिना रुकावट जारी रहे.


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