ऑपरेशन सिंदूर के बाद बौखलाया पाकिस्तान! जैश-ए-मोहम्मद की नई साजिश, अब ‘जमात अल-मुमिनात’ के ज़रिए महिलाओं को बना रहा हथियार
जम्मू-कश्मीर में आतंक फैलाने की नई साजिश! ऑपरेशन सिंदूर के बाद जैश-ए-मोहम्मद ने ‘जमात अल-मुमिनात’ नाम से महिला ब्रिगेड बनाई है, जो ऑनलाइन नेटवर्क के ज़रिए महिलाओं को आतंक के मकसद से जोड़ने का काम कर रही है।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों की हत्या के बाद भारत ने जो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया, उसने पाकिस्तान में बैठे आतंकियों की कमर तोड़ दी थी। मई 2025 में हुए इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने पीओके और पाकिस्तान के भीतर जैश-ए-मोहम्मद (JeM) समेत कई आतंकी ठिकाने तबाह कर दिए थे। बताया जाता है कि इस कार्रवाई में मसूद अजहर के परिवार के कई सदस्य मारे गए थे। अब इसी बौखलाहट में जैश एक नई चाल चल रहा है — महिलाओं को आतंक का नया चेहरा बनाना।
जैश का नया हथियार: ‘जमात अल-मुमिनात’ ब्रिगेड
खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी के मुताबिक, जैश-ए-मोहम्मद ने अब ‘जमात अल-मुमिनात’ (Jamaat al-Muminat) नाम से एक महिला ब्रिगेड तैयार की है। यह संगठन 2024 के बाद से सक्रिय है और इसका मकसद है महिलाओं को धर्म के नाम पर ब्रेनवॉश करके अपने नेटवर्क में शामिल करना।
यह ब्रिगेड जैश के महिला विंग की तरह काम कर रही है, जो दो स्तरों पर मिशन चला रही है—
1- साइकोलॉजिकल वॉरफेयर (Psychological Warfare) यानी मानसिक रूप से प्रभावित करने वाला प्रचार।
2- ग्राउंड लेवल रिक्रूटमेंट, यानी महिलाओं को संगठन में भर्ती करना और नेटवर्क फैलाना।
सोशल मीडिया और मदरसों के ज़रिए फैल रहा नेटवर्क
‘जमात अल-मुमिनात’ की गतिविधियां जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और दक्षिण भारत के कुछ इलाकों में देखी जा रही हैं। यह ग्रुप सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप ग्रुप्स और कुछ मदरसों के माध्यम से सक्रिय है।
खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जैश ने महिलाओं को आकर्षित करने के लिए धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल किया है। उनके नए सर्कुलर में मक्का और मदीना की तस्वीरें लगाई गई हैं ताकि इस मिशन को धार्मिक रंग दिया जा सके।
इन संदेशों में भावनात्मक शब्दों और धार्मिक भावनाओं का सहारा लेकर खासतौर पर पढ़ी-लिखी, शहरी मुस्लिम महिलाओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
सेल-बेस्ड स्ट्रक्चर पर काम कर रहा है यह संगठन
‘जमात अल-मुमिनात’ भी जैश-ए-मोहम्मद की तरह सेल-बेस्ड स्ट्रक्चर में काम करता है। यानी छोटे-छोटे ग्रुप्स अलग-अलग इलाकों में सक्रिय रहते हैं। इनका काम है—
- नए सदस्यों की भर्ती करना
- चंदा जुटाना
- ऑनलाइन प्रोपेगेंडा फैलाना
इससे संगठन के बड़े नेटवर्क को किसी एक झटके में तोड़ पाना मुश्किल हो जाता है।
खुफिया एजेंसियों को मिले पाकिस्तान कनेक्शन के सबूत
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत की एजेंसियों को इस ब्रिगेड के पाकिस्तान से सीधे कनेक्शन के ठोस सबूत मिले हैं। जैश के हैंडलर पाकिस्तान के रावलपिंडी और बहावलपुर से इस अभियान को चला रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान की ISI भी इस महिला विंग को परोक्ष रूप से सपोर्ट कर रही है ताकि भारत में मानसिक युद्ध (Psychological War) छेड़ा जा सके और सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान भटकाया जा सके।
भारत सतर्क: हर चाल पर रखी जा रही नज़र
जैश की इस नई साजिश से भारतीय खुफिया एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। सेना और एनआईए लगातार उन ऑनलाइन ग्रुप्स को ट्रैक कर रही हैं जिनके जरिए यह संगठन भारत में अपनी जड़ें फैलाने की कोशिश कर रहा है।
स्पष्ट है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन बुरी तरह हिल चुके हैं। अब वे महिलाओं की आड़ में भारत के खिलाफ नया मनोवैज्ञानिक मोर्चा खोलना चाहते हैं। लेकिन भारत की सुरक्षा एजेंसियां भी पहले से कहीं ज्यादा सजग और तैयार हैं।


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