महाशिवरात्रि पर वाराणसी अलर्ट मोड में, मार्कण्डेय महादेव मंदिर और कैथी घाट का प्रशासन ने लिया जायजा
महाशिवरात्रि से पहले वाराणसी में प्रशासन अलर्ट, मार्कण्डेय महादेव मंदिर और कैथी घाट का निरीक्षण, सुरक्षा, ट्रैफिक और भीड़ प्रबंधन को लेकर सख्त निर्देश।
महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर वाराणसी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आया। इसी क्रम में अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था एवं मुख्यालय) शिवहरि मीणा और जिलाधिकारी सत्येन्द्र कुमार ने संयुक्त रूप से मार्कण्डेय महादेव मंदिर, कैथी घाट और आसपास के मार्गों का गहन निरीक्षण किया। उद्देश्य साफ था—पर्व के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था से पहले ही निपटना।
निरीक्षण के दौरान मंदिर परिसर से लेकर दर्शन मार्ग, प्रवेश और निकास द्वार, बैरिकेडिंग, घाट क्षेत्र, पार्किंग स्थल और यातायात डायवर्जन तक हर बिंदु की बारीकी से समीक्षा की गई। इसके साथ ही प्रकाश व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरे, कंट्रोल रूम, जल पुलिस की तैनाती, नाव संचालन, चिकित्सा सुविधाएं और अग्निशमन व्यवस्था को भी परखा गया।
कानून-व्यवस्था पर सख्त संदेश
अपर पुलिस आयुक्त ने साफ कहा कि महाशिवरात्रि के दौरान मंदिर और घाट क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील रहेंगे, ऐसे में सुरक्षा में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पर्याप्त पुलिस बल, पीएसी और महिला पुलिस की तैनाती के साथ अधिकारियों को स्वयं ड्यूटी पॉइंट पर मौजूद रहकर निगरानी करने के निर्देश दिए गए। असामाजिक तत्वों और अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
दर्शन व्यवस्था को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश
भीड़ नियंत्रण को लेकर मंदिर परिसर में वन-वे दर्शन व्यवस्था को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया गया। बैरिकेडिंग इस तरह करने के निर्देश दिए गए ताकि किसी भी स्थान पर दबाव न बने। बुजुर्गों, दिव्यांगों और महिला श्रद्धालुओं के लिए अलग और सुगम व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।
ट्रैफिक और पार्किंग पर खास फोकस
यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने पहले से तय डायवर्जन प्लान को पूरी सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए। अवैध पार्किंग, सड़क किनारे अतिक्रमण और ठेलों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने को कहा गया, वहीं पार्किंग स्थलों का स्पष्ट चिन्हांकन कर आम लोगों को समय रहते जानकारी देने पर भी जोर दिया गया।
घाट और गंगा में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
कैथी घाट पर जल सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। जल पुलिस, गोताखोर, रेस्क्यू बोट और लाइफ जैकेट की पर्याप्त व्यवस्था रखने को कहा गया। नाव संचालन पर कड़ा नियंत्रण रहेगा और क्षमता से अधिक सवारी बैठाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। घाट क्षेत्र में लगातार पेट्रोलिंग के निर्देश भी दिए गए।
ड्रोन और सीसीटीवी से चौकस निगरानी
तकनीकी निगरानी के तहत मंदिर और घाट क्षेत्र में सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से चौबीसों घंटे नजर रखने के निर्देश दिए गए। सभी कैमरों और कंट्रोल रूम को पर्व से पहले पूरी तरह सक्रिय रखने पर जोर दिया गया।
आपात सेवाएं रहेंगी हाई अलर्ट पर
आपात स्थितियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन सेवा, विद्युत विभाग और नगर निगम के साथ बेहतर समन्वय के निर्देश दिए गए। एम्बुलेंस, फायर टेंडर, प्राथमिक चिकित्सा, प्रकाश और स्वच्छता की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ त्वरित प्रतिक्रिया दल को हर समय तैयार रहने को कहा गया।
मंदिर प्रबंधन और प्रशासन में समन्वय
निरीक्षण के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, मंदिर के पुजारियों, प्रबंधन समिति और क्षेत्र के गणमान्य लोगों के साथ बैठक की। इसमें दर्शन व्यवस्था, पूजन प्रक्रिया, भीड़ के दबाव में अपनाई जाने वाली कार्यप्रणाली और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
स्थानीय सुझावों को मिलेगा महत्व
पुजारियों और स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं की संभावित संख्या और परंपरागत धार्मिक प्रक्रियाओं को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। प्रशासन ने इन सुझावों को गंभीरता से लेते हुए जनहित में व्यवहारिक रूप से लागू करने का भरोसा दिलाया।
शांतिपूर्ण पर्व के लिए साझा जिम्मेदारी
अपर पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि महाशिवरात्रि को शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराना प्रशासन, मंदिर प्रबंधन और आम जनता की साझा जिम्मेदारी है। वहीं जिलाधिकारी ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ समय पर तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए।
कई विभागों की संयुक्त मौजूदगी
निरीक्षण के दौरान पुलिस उपायुक्त वरुणा जोन प्रमोद कुमार, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिन सिंह सहित पुलिस, प्रशासन, एनडीआरएफ और अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।


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