सावन सोमवार व्रत कथा और शिव आरती: कैसे पूरी होती हैं हर मनोकामना?

सावन सोमवार व्रत कथा और शिव जी की आरती का महत्व, विधि और संपूर्ण कथा विस्तार से जानें। जानें क्यों सावन भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ माह माना जाता है।

सावन सोमवार व्रत कथा और शिव आरती: कैसे पूरी होती हैं हर मनोकामना?

हिंदू पंचांग के अनुसार सावन मास, नव वर्ष का पांचवां महीना है। यह भगवान शिव की पूजा और व्रत के लिए सबसे उत्तम समय माना जाता है। मान्यता है कि इस महीने में सोमवार के दिन शिव जी का व्रत रखने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

साल 2025 में सावन माह की शुरुआत 11 जुलाई से हो चुकी है। सावन का पहला सोमवार व्रत 14 जुलाई 2025 को रखा जाएगा।

सावन सोमवार व्रत का महत्व
सावन के सोमवार व्रत में भक्त विशेष पूजा कर शिव जी का आशीर्वाद पाते हैं। व्रत के दिन शिव जी की पूजा, कथा व आरती के बिना व्रत अधूरा माना जाता है।

सावन सोमवार व्रत कथा: श्रद्धा और विश्वास की कहानी
एक समय की बात है, एक साहूकार था। उसके पास धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी, परंतु संतान सुख से वंचित था। पुत्र प्राप्ति के लिए वह हर सोमवार व्रत रखता और शिव-पार्वती की भक्ति करता।

माता पार्वती ने भगवान शिव से साहूकार की भक्ति का ज़िक्र किया और कहा: "हे प्रभु, यह साहूकार आपकी इतनी भक्ति करता है, फिर भी दुखी क्यों है?" शिव जी बोले: "यह पुत्र चाहता है, लेकिन इसके भाग्य में पुत्र अल्पायु है।"

पार्वती जी के आग्रह पर शिव जी ने साहूकार को पुत्र का वरदान दिया, लेकिन कहा कि वह केवल 12 वर्ष तक जीवित रहेगा। साहूकार ने कृतज्ञता दिखाई और भक्ति नहीं छोड़ी।

12 साल बाद पुत्र की मृत्यु हो गई। लेकिन साहूकार ने शिव जी में विश्वास बनाए रखा। भगवान शिव और माता पार्वती ब्राह्मण के वेश में उसके घर आए और उपाय बताया — 16 सोमवार का व्रत करो।

साहूकार ने नियमपूर्वक 16 सोमवार व्रत किए। प्रसन्न होकर शिव जी ने उसके पुत्र को पुनः जीवनदान दिया। तभी से यह मान्यता है कि सावन सोमवार व्रत और कथा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

सावन सोमवार शिव जी की आरती
ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ हर हर महादेव॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ हर हर महादेव॥

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
तीनों रूप निरखते त्रिभुवन मन मोहे॥ ॐ हर हर महादेव॥

अक्षमाला बनमाला मुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद चंदा, सोहे त्रिपुरारी॥ ॐ हर हर महादेव॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
ब्रह्मादिक सनकादिक भूतादिक संगे॥ ॐ हर हर महादेव॥

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता।
जगकर्ता जगहर्ता जगपालनकर्ता॥ ॐ हर हर महादेव॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥ ॐ हर हर महादेव॥

त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥ ॐ हर हर महादेव॥

कैसे करें सावन सोमवार व्रत?
- सुबह स्नान करके शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाएं।
- व्रत कथा ज़रूर सुनें।
- शिव जी की आरती और मंत्र जप करें।
- दिनभर फलाहार रखें और शाम को व्रत खोलें।