चुनाव आयोग बनाम ममता बनर्जी: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा SIR विवाद, आज अहम सुनवाई
मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की है। आज इस मामले पर अहम सुनवाई होनी है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी तथा चुनाव आयोग के बीच चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ शीर्ष अदालत में रिट याचिका दायर की है, जिस पर आज सुनवाई प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस संवेदनशील मामले की सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री खुद सुप्रीम कोर्ट में मौजूद रह सकती हैं।
यह मामला इसलिए भी खास है क्योंकि यह एक रिट याचिका है, जिसमें याचिकाकर्ता स्वयं अदालत में पेश होकर अपनी बात रख सकता है। हालांकि, वह वकील के रूप में नहीं बल्कि एक याचिकाकर्ता के तौर पर ही दलीलें देता है। सूत्रों के अनुसार, कानून की पढ़ाई कर चुकी ममता बनर्जी सुनवाई के दौरान पार्टी इन पर्सन के रूप में अपनी बात रखने पर विचार कर रही हैं।
तीन जजों की पीठ करेगी अहम याचिकाओं पर सुनवाई
इस पूरे मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ करेगी। अदालत के समक्ष तृणमूल सांसद डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन के साथ मोस्तरी बानू की ओर से दायर की गई याचिकाएं भी सूचीबद्ध हैं। इन याचिकाओं में एसआईआर प्रक्रिया की वैधता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
12 राज्यों में SIR, विपक्ष का बढ़ता विरोध
दरअसल, बिहार में एसआईआर कराए जाने के बाद केंद्र सरकार ने देश के 12 राज्यों में इसी प्रक्रिया को लागू करने का फैसला किया था। इस फैसले के बाद से ही विपक्षी दल लगातार इसका विरोध कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल भी उन 12 राज्यों में शामिल है, जहां मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कराया जा रहा है, जिसे लेकर ममता बनर्जी ने खुलकर आपत्ति जताई है।
चुनाव आयोग पर मनमानी का आरोप
ममता बनर्जी ने अपनी याचिका में निर्वाचन आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को प्रतिवादी बनाया है। उनका आरोप है कि राज्य में चलाई जा रही एसआईआर प्रक्रिया न केवल मनमानी है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के भी खिलाफ है। याचिका में इस पूरी प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है।
58 लाख वोटरों के नाम कटने का दावा
मुख्यमंत्री का दावा है कि एसआईआर के नाम पर बंगाल में लगभग 58 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि कई मामलों में जीवित नागरिकों को मृत घोषित कर दिया गया है, जिससे आम मतदाताओं के मतदान अधिकार पर सीधा असर पड़ रहा है।
राजनीतिक साजिश या प्रशासनिक प्रक्रिया?
पिछले करीब 15 वर्षों से ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं और भारतीय जनता पार्टी अब तक राज्य में सत्ता हासिल नहीं कर पाई है। तृणमूल समर्थकों का मानना है कि चुनावी हार के बाद अब वोटर लिस्ट के जरिए ममता बनर्जी की राजनीतिक ताकत को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।


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