लाइफस्टाइल के लिए उधार! मिडल क्लास कर्ज़ के जाल में क्यों फंस रही है?
भारत में मिडल क्लास अब घर बनाने के लिए नहीं बल्कि लाइफस्टाइल दिखाने के लिए लोन ले रहा है। बढ़ते क्रेडिट कार्ड खर्च और पर्सनल लोन ने ईएमआई का बोझ बढ़ा दिया है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
एक वक्त था जब लोग बैंक से लोन (Bank Loan) लेते थे तो उसका मकसद होता था कोई संपत्ति (Asset) खड़ी करना—जैसे घर खरीदना, दुकान खोलना या बिजनेस शुरू करना। लेकिन आज की तस्वीर बिल्कुल अलग है।
अब मिडल क्लास (Middle Class) तेजी से अपनी लाइफस्टाइल को ऊंचा दिखाने के लिए पर्सनल लोन (Personal Loan) और क्रेडिट कार्ड (Credit Card) के भरोसे खर्च कर रहा है। नतीजा? हर महीने बढ़ती ईएमआई (EMI) और Debt Trap यानी कर्ज़ के जाल में फंसना।
क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन में रिकॉर्ड उछाल
आंकड़े बताते हैं कि भारत में पिछले 13 सालों में क्रेडिट कार्ड खर्च (Credit Card Spend) करीब 13 गुना बढ़कर 15.6 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है।
- वहीं सिर्फ पिछले 2 साल में पर्सनल लोन की ग्रोथ 23% तक बढ़ी है।
- 2023 में प्रति व्यक्ति औसत कर्ज़ 3.9 लाख रुपये था, जो मार्च 2025 तक बढ़कर 4.8 लाख रुपये हो गया।
लोन अब घर के लिए नहीं, बल्कि आईफोन और कार के लिए
बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, आज लिए जा रहे लोन का केवल 29% हिस्सा Home Loan है। जबकि 55% हिस्सा ऐसी चीज़ों पर खर्च हो रहा है, जो संपत्ति नहीं बनातीं—जैसे:
- महंगे iPhone
- लग्ज़री बाइक्स और कार
- ब्रांडेड गैजेट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स
- ट्रैवल और वेडिंग
यानी लोग आजकल लोन से सिर्फ तुरंत खुशी (Instant Gratification) खरीद रहे हैं।
क्रेडिट कार्ड का ज़बरदस्त असर
क्रेडिट कार्ड सर्कुलेशन 13 साल में 5 गुना बढ़कर 10.8 करोड़ हो गया है। EMI का विकल्प और Zero Down Payment जैसी सुविधाओं ने लोगों को लालच में डाल दिया है। पेमेंट के लिए समय मिलने का भ्रम कई बार लोगों को बकाया चुकाने में लापरवाह बना देता है।
RBI और इकोनॉमिस्ट की चेतावनी
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) भी इस ट्रेंड से परेशान है। RBI ने कई बार बढ़ते पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड बकाया को घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बताया है।
इकोनॉमिस्ट मानते हैं कि उपभोग आधारित उधारी शॉर्ट टर्म में इकोनॉमी को तो बढ़ावा देती है, लेकिन लॉन्ग टर्म में डिफॉल्ट का खतरा बढ़ जाता है।
मुद्दा क्या है?
- हमारे माता-पिता ने कर्ज़ लिया ताकि भविष्य में संपत्ति बने,
- हम कर्ज़ ले रहे हैं ताकि आज दिखावा हो सके।
अब सवाल है—क्या ये बदलाव भारत के मिडल क्लास में सोच के बदलाव का संकेत है या एक बड़ा वित्तीय खतरा?


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