एनआईटी पटना में शुरू हुआ ‘Innovation for Sustainable Future’ पर 6 दिवसीय FDP — शिक्षकों में नवाचार और उद्यमिता की सोच को मिलेगी नई दिशा

एनआईटी पटना में AICTE-ATAL Academy के सहयोग से “भारत के सतत भविष्य के लिए नवाचार और उद्यमिता” विषय पर छह दिवसीय FDP का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने नवाचार को भारत के विकास का प्रमुख साधन बताया।

एनआईटी पटना में शुरू हुआ ‘Innovation for Sustainable Future’ पर 6 दिवसीय FDP — शिक्षकों में नवाचार और उद्यमिता की सोच को मिलेगी नई दिशा

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) पटना के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग द्वारा AICTE-ATAL Academy के सहयोग से छह दिवसीय Faculty Development Programme (FDP) की शुरुआत हुई। इस कार्यक्रम का विषय है — “भारत के सतत भविष्य के लिए नवाचार और उद्यमिता” (Innovation and Entrepreneurship for Sustainable Future of India)।

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक सरस्वती वंदना और NIT पटना की उपलब्धियों पर आधारित वीडियो प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसने संस्थान की तकनीकी प्रगति और नवाचार की भावना को प्रदर्शित किया।

नवाचार ही विकास का आधार: निदेशक प्रो. पी.के. जैन
एनआईटी पटना के निदेशक प्रो. पी.के. जैन ने उद्घाटन भाषण में कहा कि भारत के सतत विकास का रास्ता नवाचार और उद्यमिता से होकर ही गुजरता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि बदलती तकनीकी दुनिया में शिक्षकों की भूमिका सिर्फ ज्ञान देने की नहीं, बल्कि छात्रों में innovative mindset विकसित करने की भी है।

शिक्षकों के लिए सृजनात्मक मंच: डीन प्रो. एम.पी. सिंह
कार्यक्रम में डीन (शैक्षणिक) प्रो. एम.पी. सिंह ने इस पहल को “creative learning और interdisciplinary collaboration” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे FDP शिक्षकों को पारंपरिक शिक्षण से आगे बढ़कर नई शिक्षा नीतियों और तकनीकी प्रवृत्तियों को समझने का अवसर देते हैं।

एफडीपी की रूपरेखा और उद्देश्यों पर चर्चा
डॉ. दीपक कुमार बेहरा, कार्यक्रम के समन्वयक, ने बताया कि इन छह दिनों में प्रतिभागियों को innovation ecosystem, entrepreneurship challenges, design thinking, sustainable development goals (SDGs) जैसे विषयों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन मिलेगा।

कार्यक्रम का मकसद शिक्षकों को सतत विकास आधारित उद्यमिता के लिए तैयार करना है, ताकि वे छात्रों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षित कर सकें।

मुख्य अतिथि ने नवाचार को बताया ‘Inclusive Growth’ की कुंजी
प्रो. सीमा जोशी, किरोड़ी मल कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) की प्राध्यापक और मुख्य अतिथि, ने अपने संबोधन में कहा कि नवाचार केवल तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समावेशन और सतत विकास की आत्मा है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी और उद्यमशील दृष्टिकोण विकसित करें।

कार्यक्रम के समापन सत्र में डॉ. अमजद अली ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजकों को धन्यवाद ज्ञापन दिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गान के साथ हुआ। यह छह दिवसीय ऑनलाइन FDP 15 नवंबर 2025 तक चलेगा और इसमें देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं तकनीकी संस्थानों से शिक्षक भाग ले रहे हैं।