उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट से 1.25 करोड़ डुप्लीकेट नाम हटेंगे, AI वेरिफिकेशन में करेगा मदद
उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले वोटर लिस्ट की सफाई अभियान शुरू। एआई तकनीक से डुप्लीकेट मतदाता पाए गए, बीएलओ घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। जानिए पूरी प्रक्रिया।
उत्तर प्रदेश में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले वोटर लिस्ट की सफाई का बड़ा अभियान शुरू हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने एआई (Artificial Intelligence) तकनीक के ज़रिए पूरे प्रदेश की वोटर लिस्ट की जांच कराई है। इस जांच में लगभग सवा करोड़ मतदाताओं के नाम डुप्लीकेट पाए गए हैं। अब सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बीएलओ (Booth Level Officer) घर-घर जाकर इन मतदाताओं के नामों का भौतिक सत्यापन करें।
एक व्यक्ति के नाम कई ग्राम पंचायतों में, उम्र और लिंग में अंतर
जांच में यह पाया गया कि एक ही व्यक्ति का नाम कई जगहों पर दर्ज है। कभी उसके नाम के पहले हिस्से में तो कभी बाद में उसकी जानकारी दर्ज है। इसके अलावा उम्र और लिंग में भी असंगति पाई गई। एआई ने व्यक्ति और उसके पिता के नाम का 80% तक मिलान कर रिपोर्ट तैयार की है। ऐसे मामलों की फाइनल जांच बीएलओ मौके पर जाकर करेंगे।
सत्यापन में आधार कार्ड और अधिकारियों की निगरानी
जांच के दौरान बीएलओ केवल मतदाता का नाम नहीं बल्कि उनका आधार कार्ड भी देखेंगे। इस सत्यापन प्रक्रिया में सुपरवाइजर और एसडीएम भी शामिल रहेंगे, जो एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र के अधिकारियों के साथ समन्वय करेंगे। फिलहाल यह अभियान केवल ग्रामीण क्षेत्रों में लागू किया जाएगा।
मतदाता सूची की सफाई से चुनाव प्रक्रिया होगी पारदर्शी
वर्तमान में उत्तर प्रदेश में लगभग 12 करोड़ मतदाता पंजीकृत हैं। बिहार की तर्ज पर यह वेरिफिकेशन प्रक्रिया मतदान की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए शुरू की गई है। आगामी अप्रैल-मई में होने वाले पंचायत चुनाव से पहले यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


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