मुकेश सहनी ने दिलीप जायसवाल पर किया पलटवार, कहा- निषाद समाज अब लोडर नहीं, लीडर बनने वाले हैं
मुकेश सहनी ने भाजपा द्वारा निषाद आयोग की घोषणा को झुनझुना बताते हुए कहा कि एनडीए सरकार को 20 सालों में निषाद समाज की याद नहीं आई। उन्होंने कहा, अब जब चुनाव नजदीक हैं और विदाई तय है, तो भाजपा निषाद समाज को बरगलाने का प्रयास कर रही है।
विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख मुकेश सहनी ने भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल की "झोला उठाने वाला" टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने इसे निषाद समाज और बिहार का अपमान करार दिया और माफी की मांग की। सहनी ने कहा, कोई अपने समाज के अधिकार के लिए संघर्ष कर रहा है तो वह झोला नहीं उठाता, बल्कि अपने समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाता है। निषाद समाज अब लोडर नहीं, लीडर बनने वाला है।
भाजपा पर झुनझुना राजनीति का आरोप
मुकेश सहनी ने भाजपा द्वारा निषाद आयोग की घोषणा को झुनझुना बताते हुए कहा कि एनडीए सरकार को 20 सालों में निषाद समाज की याद नहीं आई। उन्होंने कहा, अब जब चुनाव नजदीक हैं और विदाई तय है, तो भाजपा निषाद समाज को बरगलाने का प्रयास कर रही है।
निषाद समाज के आरक्षण की मांग
सहनी ने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि अगर पार्टी को निषाद समाज का समर्थन चाहिए, तो अन्य राज्यों की तरह बिहार में भी निषाद समाज को आरक्षण प्रदान करे। हमारे अधिकार की लड़ाई जारी रहेगी और इसे दबाया नहीं जा सकता।
भाजपा के निषाद महासम्मेलन पर कटाक्ष करते हुए मुकेश सहनी ने कहा, सम्मेलन के जरिए भाजपा भीड़ तो जुटा सकती है, लेकिन निषाद समाज का वोट नहीं। भाजपा ने हमेशा निषादों को बरगलाने का काम किया है।
निषाद समाज के आत्मनिर्भर बनने का आह्वान
सहनी ने निषाद समाज और अन्य अति पिछड़ी जातियों से अपने अधिकारों के लिए जागरूक और संघर्षशील बनने की अपील करते हुए कहा कि बिहार के निषाद अब भाजपा का झंडा नहीं उठाएंगे। वे अपने अधिकारों के लिए लड़ेंगे और नेतृत्व करेंगे।
मुकेश सहनी की प्रतिक्रिया बिहार की राजनीति में निषाद समाज के अधिकारों और भाजपा की रणनीति को लेकर एक नई बहस को जन्म दे सकती है। आगामी चुनावों में इस मुद्दे का असर देखने को मिल सकता है।


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