मुफ्त सोलर से चमकेंगे गरीबों के घर, 31 मार्च तक देनी होगी सहमति

पीएम सूर्य घर–मुफ्त बिजली योजना के तहत कुटीर ज्योति उपभोक्ताओं के घरों पर 1.1 किलोवाट के सोलर पैनल लगाए जाएंगे। योजना में शामिल होने के लिए 31 मार्च 2026 तक सहमति देना जरूरी है।

मुफ्त सोलर से चमकेंगे गरीबों के घर, 31 मार्च तक देनी होगी सहमति
प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रधानमंत्री सूर्य घर–मुफ्त बिजली योजना के तहत गरीब परिवारों को सोलर ऊर्जा से जोड़ने की प्रक्रिया तेज हो गई है। यूएलए मोड के अंतर्गत कुटीर ज्योति श्रेणी के उपभोक्ताओं से सहमति ली जा रही है ताकि उनके घरों पर सोलर पैनल लगाए जा सकें। जो उपभोक्ता इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, वे सुविधा ऐप के माध्यम से अपनी सहमति दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए विभाग ने तय समय सीमा भी तय की है, ताकि अधिक से अधिक परिवारों को इस योजना से जोड़ा जा सके।

स्मार्टफोन नहीं तो कार्यालय या शिविर में भी दे सकते हैं सहमति
कई बीपीएल परिवारों के पास स्मार्टफोन नहीं होने की वजह से वे ऐप के जरिए सहमति नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे उपभोक्ताओं के लिए विभाग ने अलग व्यवस्था की है। वे अपने नजदीकी बिजली कार्यालय या लगाए गए विशेष शिविर में जाकर भी सहमति पत्र जमा कर सकते हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सहमति देने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 रखी गई है, इसलिए इच्छुक उपभोक्ताओं को समय रहते प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

पहले चरण में ढाई लाख घरों पर लगेंगे सोलर पैनल
योजना के तहत चयनित घरों की छत पर करीब 1.1 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर पैनल लगाया जाएगा। पहले चरण में करीब ढाई लाख घरों को इस योजना से जोड़ा जाना प्रस्तावित है। खास बात यह है कि कुटीर ज्योति श्रेणी के उपभोक्ताओं के घरों की छत पर ये सोलर पैनल बिना किसी शुल्क के लगाए जाएंगे, जिससे गरीब परिवारों को बिजली खर्च से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

छाया रहित छत मिलने पर ही लगाए जाएंगे पैनल
सोलर पैनल लगाने से पहले विभाग की टीम संबंधित घरों का निरीक्षण करेगी। यदि घर की छत खुली और छाया रहित पाई जाती है तो वहां सोलर पैनल स्थापित किए जाएंगे। ये सभी पैनल बिजली ग्रिड से जुड़े रहेंगे, जिससे घर में उपयोग के साथ अतिरिक्त बिजली भी प्रणाली में शामिल हो सकेगी। इससे उपभोक्ताओं को स्वच्छ और किफायती ऊर्जा का लाभ मिलेगा।

पूरी योजना से 275 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य
विभाग के अनुसार इस परियोजना के पूरा होने के बाद करीब 275 मेगावाट बिजली का उत्पादन संभव होगा। इससे एक ओर जहां गरीब परिवारों को मुफ्त बिजली का लाभ मिलेगा, वहीं स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देकर बिजली व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।