रामपुर में अखिलेश-आजम की मुलाकात से बढ़ी सियासी हलचल — SP में रिश्तों की नई पटकथा लिखने की तैयारी?

रामपुर में अखिलेश यादव और आजम खान की मुलाकात से सपा की राजनीति में नई हलचल मच गई है। आजम ने साफ कहा कि वे सिर्फ अखिलेश से ही मिलेंगे। नदवी को बीच रास्ते में रोकने से सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

रामपुर में अखिलेश-आजम की मुलाकात से बढ़ी सियासी हलचल — SP में रिश्तों की नई पटकथा लिखने की तैयारी?
Azam Khan and Akhilesh Yadav

उत्तर प्रदेश की राजनीति बुधवार को उस समय अचानक गर्मा गई जब समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अचानक रामपुर पहुंच गए। यहां उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिग्गज मुस्लिम चेहरा आजम खान से उनके घर पर मुलाकात की।

अखिलेश की यात्रा को देखते हुए रामपुर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं। उनके पहुंचने से पहले ही पार्टी कार्यकर्ता आजम खान के आवास के बाहर जुटने लगे थे। सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में अकेले में मुलाकात होने जा रही है, जिसे पार्टी के अंदरूनी समीकरणों के लिहाज़ से बेहद अहम माना जा रहा है।

नदवी को रास्ते में रोकना बना चर्चा का विषय
जानकारी के मुताबिक, अखिलेश यादव के साथ लखनऊ से सपा सांसद मौलाना मोहिबुल्ला नदवी भी रवाना हुए थे, लेकिन उन्हें बरेली में ही रोक दिया गया। राजनीतिक गलियारों में यह कदम आजम खान के रुख से जोड़कर देखा जा रहा है, जिन्होंने कुछ दिन पहले साफ कहा था — मैं किसी से नहीं मिलूंगा, सिर्फ अखिलेश यादव से ही मुलाकात करूंगा।

उनके इस बयान के बाद सपा खेमे में यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या आजम अब भी पार्टी में अलग-थलग महसूस कर रहे हैं, या यह मुलाकात किसी ‘नई सियासी शुरुआत’ का संकेत है।

अखिलेश की यात्रा का पूरा शेड्यूल
बुधवार सुबह अखिलेश यादव लखनऊ से बरेली एयरपोर्ट पहुंचे, जहां से उन्होंने चार्टर विमान से रामपुर के लिए उड़ान भरी। उनके साथ सुरक्षा अधिकारियों और करीबी सहयोगियों का छोटा दल था। रामपुर पहुंचने के बाद उन्होंने सीधे आजम खान के आवास का रुख किया।

इस मुलाकात की आधिकारिक जानकारी पार्टी के मीडिया सेल ने भले न दी हो, लेकिन स्थानीय सपा नेताओं का कहना है कि यह बैठक “बहुत अहम और लंबी बातचीत” का हिस्सा होगी।

आजम खान का सियासी सफर और जेल से वापसी
आजम खान, जो कभी सपा के संस्थापक नेताओं में गिने जाते थे, पिछले कुछ वर्षों में कानूनी मामलों और राजनीतिक दूरी के कारण हाशिए पर चले गए थे। वे कई आपराधिक मामलों में जमानत मिलने के बाद हाल ही में 23 महीने की कैद काटने के बाद सीतापुर जेल से रिहा हुए।

रामपुर से विधायक, सांसद और राज्यसभा सदस्य रह चुके आजम खान ने सपा के मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी। अब जब वे जेल से बाहर आए हैं, तो यह मुलाकात सपा में पुराने समीकरणों को फिर से जोड़ने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

क्या सपा में नए समीकरण बन रहे हैं?
सपा के भीतर मुस्लिम नेतृत्व को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। वर्तमान में पार्टी के पास 37 सांसद और 107 विधायक हैं, जिनमें 34 मुस्लिम विधायक और 4 मुस्लिम सांसद शामिल हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अखिलेश यादव 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के मुस्लिम आधार को फिर से एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं — और यह मुलाकात उसी रणनीति का हिस्सा हो सकती है।

आजम का रुख और सपा का भविष्य
मुलाकात से पहले आजम खान ने मीडिया से कहा था — कोई कार्यक्रम नहीं है, अगर अखिलेश यादव मुझसे मिलेंगे तो मैं केवल उनसे ही मिलूंगा। उनका यह बयान भले ही सादा लगे, लेकिन इसके भीतर गहरी राजनीतिक परतें हैं।

पार्टी के अंदर यह भी माना जा रहा है कि अखिलेश यादव और आजम खान के बीच इस बातचीत से “भरोसे का पुल” फिर से बनाया जा सकता है।

कई नेता उम्मीद जता रहे हैं कि यह बैठक सपा के लिए राजनीतिक पुनर्गठन (Political Reconciliation) की दिशा में एक अहम कदम साबित होगी।