कथा-वाचक विवाद से एंटी-एजिंग तक: बाबा रामदेव का बेबाक बयान और जातिगत भेदभाव पर सख्त संदेश

बाबा रामदेव ने NDTV को दिए इंटरव्यू में जातिगत भेदभाव, ब्राह्मण बनाम यादव विवाद और सनातन धर्म की गहराई पर चर्चा की। जानिए उनके विचार।

कथा-वाचक विवाद से एंटी-एजिंग तक: बाबा रामदेव का बेबाक बयान और जातिगत भेदभाव पर सख्त संदेश
Baba Ramdev

योग गुरु बाबा रामदेव ने NDTV इंडिया को दिए अपने विशेष इंटरव्यू में इटावा के कथा वाचक विवाद, शेफाली जरीवाला की मौत के बाद एंटी-एजिंग ट्रीटमेंट पर सवाल, और समाज में जातिगत भेदभाव जैसे मुद्दों पर बेबाक राय रखी।

उन्होंने समाज में फैले विभाजन और भेदभाव को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। बाबा रामदेव ने कहा, "हम सभी का डीएनए एक है। हमारा संविधान और वेद भी यही कहते हैं। शूद्र का मतलब अछूत नहीं है। किसी भी तरह का भेदभाव हमारी परंपरा और शास्त्रों के खिलाफ है।

जातिगत भेदभाव और 'फोर इन वन' का दर्शन
बाबा रामदेव ने जाति व्यवस्था को लेकर स्पष्ट रूप से कहा, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, और शूद्र सभी अपने-अपने कर्म से श्रेष्ठ हैं। किसी का भी कर्म उसे महान बनाता है, न कि जातिगत दंभ। उन्होंने खुद को "फोर इन वन" बताते हुए कहा कि हर व्यक्ति में सभी वर्णों का अंश होता है। शूद्र का मतलब अछूत नहीं होता। यह वैदिक और संवैधानिक दृष्टि से गलत है।

ब्राह्मण बनाम यादव विवाद पर राय
ब्राह्मण बनाम यादव विवाद पर बोलते हुए बाबा ने कहा, जिन्हें लगता है कि ब्राह्मण का काम केवल ब्राह्मण को करना चाहिए, वे राजनीति, कृषि और अन्य पेशे छोड़ दें। यह कहना व्यावहारिक नहीं है। हर व्यक्ति को अपनी योग्यता के आधार पर काम करने का अधिकार है। किसी को भी यह अधिकार नहीं कि वह समाज में विभाजन का बीज बोए।

सनातन धर्म और समाज की एकता पर जोर
बाबा ने सनातन धर्म की गहराई को समझने की बात कही। उन्होंने कहा, सबको चलाने वाला ईश्वर एक है। भेदभाव करना सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। हमारे पूर्वज, धरती मां, और प्रकृति मां एक हैं। तो फिर भेदभाव क्यों?

बागेश्वर धाम के बाबा पर प्रतिक्रिया
इटावा विवाद पर बागेश्वर धाम के बाबा के बयान पर असहमति जताते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि वह इस मुद्दे पर उनसे फोन पर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा, हमें शास्त्रों का सही अर्थ समझना चाहिए। झूठी बातों पर टीका-टिप्पणी से समाज में भ्रम फैलता है।