चुनावी साल में खजाना खाली! वादों के बाद RBI से 16,000 करोड़ मांग रही नीतीश सरकार
बिहार चुनाव 2025 से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोकलुभावन योजनाओं और नौकरियों का ऐलान किया। इन योजनाओं के लिए सरकार RBI से 16 हजार करोड़ रुपये का कर्ज मांग रही है। विपक्ष ने इस पर तीखा हमला बोला है। जानिए पूरी कहानी।
बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने योजनाओं और नौकरियों का पिटारा खोल दिया है। पेंशन, वेतन वृद्धि, मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं के ऐलान के बाद अब सवाल यह है कि इनके लिए पैसा कहाँ से आएगा? राज्य सरकार ने RBI से 16,000 करोड़ रुपये का कर्ज मांगने की गुहार लगाई है।
सरकार चाहती है कि जुलाई से सितंबर 2025 तक — यानी मतदान से ठीक पहले — यह रकम उसे मिल जाए ताकि योजनाओं को जमीन पर उतारा जा सके।
RBI के दरवाजे पर बिहार सरकार
बिहार के सीमित राजस्व संसाधनों से इतनी बड़ी राशि का इंतजाम मुमकिन नहीं। यही वजह है कि सरकार ने रिज़र्व बैंक का दरवाजा खटखटाया है। मंत्रियों का दावा है कि यह कर्ज वित्तीय नियमों के दायरे में लिया जा रहा है और राज्य हित में है।
विपक्ष का तंज: 'कर्ज लेकर घी पी रही सरकार'
विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उनका आरोप है कि नीतीश सरकार चुनावी फायदे के लिए लोकलुभावन योजनाएं चला रही है और सत्ता में वापसी न होने पर ये योजनाएं अधूरी रह जाएंगी। विपक्ष का कहना है, सरकार कर्ज लेकर घी पी रही है और चुनाव के बाद इनका हाजमा खराब हो जाएगा। योजनाएं धरी की धरी रह जाएंगी।
कितनी योजनाओं के लिए कितनी जरूरत?
हाल ही में सरकार ने कई बड़े फैसले लिए, जिनके लिए बड़ी रकम की ज़रूरत होगी:
- सामाजिक सुरक्षा पेंशन ₹400 से बढ़ाकर ₹1100 — हर महीने ~₹1200 करोड़।
- पंचायत प्रतिनिधियों का वेतन 1.5 गुना।
- जीविका कर्मियों का वेतन दोगुना।
- 94 लाख गरीब परिवारों को ₹2 लाख प्रति परिवार।
- 1 अगस्त 2025 से 125 यूनिट मुफ्त बिजली।
- सरकारी नौकरियों के नए विज्ञापन।
बिहार पर कर्ज का बढ़ता बोझ
राज्य सरकार पर पहले से ही भारी कर्ज है:
- 2025 के अंत तक कुल कर्ज: ₹4.06 लाख करोड़
- हर दिन ब्याज का भुगतान: ₹63 करोड़
- 2025-26 में राजकोषीय घाटा: GSDP का 9.2% (अनुमानित), जबकि मानक सीमा 3% है।
एक्सपर्ट्स की सलाह: टैक्स बेस बढ़ाओ, छोटे उद्योगों को बढ़ावा दो
वित्त विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कर्ज उत्पादक योजनाओं में लगाया जाए तो ठीक है, लेकिन इसकी एक सीमा होती है। बिहार सरकार को अपने राजस्व में सुधार करना चाहिए।
- टैक्स बेस बढ़ाना
- छोटे उद्योगों के क्लस्टर विकसित करना
- निवेशकों को आकर्षित करने के लिए नई नीतियाँ
नई सरकार को विरासत में क्या मिलेगा?
अगर विधानसभा चुनाव में नीतीश सरकार सत्ता में नहीं लौटती तो नई सरकार को विरासत में भारी कर्ज और अधूरी योजनाएं मिलेंगी। RBI से मांगे गए 16,000 करोड़ का बोझ भी नए मुख्यमंत्री को उठाना होगा।


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