Paras Hospital Shootout: बिहार की सुरक्षा पर सवाल, मुकेश सहनी का आरोप - अपराधियों को संरक्षण दे रही सरकार

पटना के पारस हॉस्पिटल में दिनदहाड़े कुख्यात अपराधी चंदन मिश्रा की गोली मारकर हत्या। पढ़ें पूरी रिपोर्ट कि कैसे अपराधी अस्पताल में घुसे और वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए।

Paras Hospital Shootout: बिहार की सुरक्षा पर सवाल, मुकेश सहनी का आरोप - अपराधियों को संरक्षण दे रही सरकार
Mukesh sahni

पटना के मशहूर पारस हॉस्पिटल में गुरुवार को हुए गोलीकांड ने बिहार की कानून-व्यवस्था और अस्पताल की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जेल में सजा काट रहा बक्सर का कुख्यात अपराधी चंदन मिश्रा, जो इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती था, उसकी हत्या बेखौफ अपराधियों ने वार्ड में घुसकर कर दी।

'जहां लोग जान बचाने आते हैं, वहीं मौत मिली'
वीआईपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश सहनी ने इस घटना के बाद नीतीश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा — सरकार अपराधियों को अपने संरक्षण में पाल रही है, तभी अस्पताल जैसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थान पर भी अपराधी हथियार लेकर घुस जाते हैं और हत्या कर फरार हो जाते हैं। जहां लोग जीवन बचाने आते हैं, वहां अब उन्हें मौत मिल रही है।

घटना के बाद अस्पताल में अफरातफरी मच गई। लोग सवाल पूछने लगे कि जिस अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों के लिए कड़ी सुरक्षा होती है, गार्ड हर जगह तैनात रहते हैं, वहां 4–5 अपराधी हथियार लेकर कैसे पहुंच गए?

कैसे हुई वारदात?
सूत्रों के मुताबिक, बक्सर के कुख्यात अपराधी चंदन मिश्रा को इलाज के लिए 21 दिन की पैरोल पर पटना लाया गया था। मंगलवार को अचानक 4–5 हथियारबंद अपराधी अस्पताल में दाखिल हुए और सीधे वार्ड में पहुंचकर चंदन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। मौके पर ही उसकी मौत हो गई। हमलावर आराम से भाग निकले।

पुलिस की जांच में कई एंगल
पटना ज़ोन के आईजी जितेंद्र राणा ने बताया कि अपराधियों की पहचान कर ली गई है, सभी बक्सर और आसपास के इलाके के बताए जा रहे हैं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि अस्पताल के किसी कर्मचारी की इसमें मिलीभगत तो नहीं थी। जल्द ही पूरे मामले का खुलासा करने का दावा किया गया है।

कौन था चंदन मिश्रा?
चंदन मिश्रा पिछले एक दशक से अपराध की दुनिया में सक्रिय था। 2011 में इंडस्ट्रियल थाना क्षेत्र में दो चर्चित हत्याओं में नाम आया। जेल क्लर्क हैदर अली और कारोबारी राजेंद्र केसरी की हत्या का आरोपी। कोर्ट से आजीवन कारावास की सजा पाकर बक्सर जेल में बंद था, बाद में भागलपुर जेल भेजा गया।

सबसे बड़ा सवाल: अस्पताल की सुरक्षा कहाँ गई?
सवाल उठ रहे हैं कि कड़े पहरे के बावजूद अपराधियों ने अस्पताल में कैसे एंट्री की। मरीजों के परिजनों तक को सख्त जांच से गुजरना पड़ता है, फिर भी अपराधी हथियारों के साथ दाखिल कैसे हो गए? क्या अंदर के ही कुछ लोग इस खेल में शामिल हैं?