SIR विवाद में सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी — आधार कार्ड से साबित नहीं होगी नागरिकता
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले SIR प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान आधार कार्ड की वैधता, मृत घोषित किए गए जिंदा लोग और 65 लाख नाम हटाए जाने पर तीखी बहस हुई। कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण और चुनाव आयोग के वकीलों में तकरार, कोर्ट ने कहा — आधार अंतिम प्रमाण नहीं, जांच जरूरी।
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को अहम सुनवाई हुई। विवाद इस बात पर है कि मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं और आधार कार्ड को अंतिम प्रमाण मानने के बजाय उसकी जांच-परख की जा रही है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने साफ कहा — चुनाव आयोग सही है यह कहने में कि आधार को अंतिम प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता, इसकी जांच-परख जरूरी है।
सिब्बल का आरोप: ‘गंभीर गड़बड़ी, जिंदा लोगों को मृत दिखाया’
सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने अदालत में कहा कि 1950 के बाद जन्मा हर व्यक्ति भारत का नागरिक है, लेकिन SIR प्रक्रिया में भारी गड़बड़ियां हुई हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया — एक छोटे से विधानसभा क्षेत्र में 12 जिंदा लोगों को मृत घोषित कर दिया गया। BLO (Booth Level Officer) ने अपना काम ठीक से नहीं किया। 65 लाख नाम हटाए गए, जिसे उन्होंने सामूहिक बहिष्करण बताया।
सिब्बल का कहना था कि फॉर्म 4 और फॉर्म 6 की प्रक्रिया में कानून का पालन नहीं हुआ और मांगे गए दस्तावेज़ कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं हैं।
चुनाव आयोग का पक्ष: ‘ड्राफ्ट रोल, छोटी-मोटी गलती हो सकती है’
चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा, यह केवल ड्राफ्ट रोल है, जिसमें सुधार की गुंजाइश रहती है। इतने बड़े अभ्यास में छोटी-मोटी गलती हो सकती है। मृत को जीवित बताना सही नहीं है। आरोप भ्रामक और अतिरंजित हैं।
जस्टिस बागची की टिप्पणी: ‘तैयारी के कदम सही तरीके से न हों तो गंभीर मामला’
जस्टिस जॉयमाला बागची ने कहा कि ड्राफ्ट रोल से पहले की तैयारी सही तरीके से न हो तो मामला गंभीर हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियम 10 और नियम 12 के तहत जिनके नाम 2003 के रोल में नहीं हैं, उन्हें दस्तावेज़ देने होंगे।
दस्तावेज़ों की कमी पर बहस
सिब्बल ने कोर्ट में आंकड़े रखे:
जन्म प्रमाण पत्र — केवल 3.056% लोगों के पास।
पासपोर्ट — 2.7% के पास।
मैट्रिकुलेशन प्रमाणपत्र — 14.71% के पास।
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यह स्थिति केवल बिहार की नहीं, अन्य राज्यों में भी हो सकती है। लेकिन किसी न किसी प्रमाण से नागरिकता साबित करना जरूरी है।
प्रशांत भूषण का आरोप: ‘BLO की रिपोर्ट चौंकाने वाली’
वकील प्रशांत भूषण ने दावा किया, चुनाव आयोग के पास पूरी जानकारी है लेकिन वे साझा नहीं कर रहे। व्हिसलब्लोअर द्वारा मिली सूची में पाया गया कि फॉर्म भरने वाले 10-12% मतदाताओं को ‘अनुशंसित नहीं’ किया गया है। देश के इतिहास में पहली बार चुनाव आयोग ने ऐसा कदम उठाया है।
सुप्रीम कोर्ट का संकेत
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि अगर 7.9 करोड़ मतदाताओं में से 7.24 करोड़ ने फॉर्म भरा है, तो “1 करोड़ मतदाताओं के गायब होने” का आरोप कमजोर पड़ता है। हालांकि, प्रक्रिया की वैधता और दस्तावेज़ों की अनिवार्यता पर बहस जारी रहेगी।


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