प्रशांत किशोर का नया फॉर्मूला: मुस्लिम–हिंदू गठबंधन से बदलेगा बिहार का सियासी समीकरण?
बिहार चुनाव 2025 से पहले प्रशांत किशोर ने बड़ा सियासी फॉर्मूला पेश किया। उन्होंने मुस्लिमों को गांधी-आंबेडकर को मानने वाले हिंदुओं के साथ गठबंधन करने की सलाह दी। जानें इसका असर RJD, कांग्रेस और महागठबंधन पर।
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीति अपने चरम पर है। हर पार्टी वोटरों को लुभाने के लिए नई रणनीति बना रही है। इसी बीच जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने एक ऐसा फॉर्मूला सामने रखा है जिसने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। उन्होंने सुझाव दिया है कि बिहार के मुसलमानों को गांधी, आंबेडकर, समाजवाद और साम्यवाद को मानने वाले हिंदुओं के साथ हाथ मिलाना चाहिए।
किशनगंज से उठी नई सियासी बात
प्रशांत किशोर ने यह बात किशनगंज के एक मुस्लिम सम्मेलन में रखी। उन्होंने कहा कि अब तक मुसलमानों को चुनाव लड़ने से हतोत्साहित किया गया और उन्हें "अल्पसंख्यक" बनाकर राजनीतिक रूप से कमजोर किया गया। उनका कहना है कि अगर 20% मुस्लिम और बीजेपी को वोट न देने वाले हिंदू एकजुट हो जाएं तो बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव संभव है।
'बीजेपी को हराने का रास्ता वैचारिक'
प्रशांत किशोर ने कहा, देश में 80% हिंदू हैं, लेकिन बीजेपी को केवल 40% हिंदू वोट मिलते हैं। बाकी 40% हिंदू गांधी, आंबेडकर, समाजवाद और वामपंथी विचारधारा को मानते हैं। अगर यही वर्ग मुस्लिमों के साथ आए तो एक वैकल्पिक राजनीति खड़ी की जा सकती है।
उन्होंने महागठबंधन पर भी कटाक्ष किया और कहा कि लालू-नीतीश के 30 साल के शासन में मुस्लिम समाज का कोई ठोस विकास नहीं हुआ।
बिहार में मुस्लिम राजनीति की ताकत
- बिहार की कुल आबादी लगभग 13 करोड़ (2023 जाति-जनगणना)
- मुस्लिम आबादी: 2 करोड़ 30 लाख (17.7%)
- 87 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम वोट निर्णायक
- किशनगंज (68%), कटिहार (44%), अररिया (43%) और पूर्णिया (38%) में सबसे अधिक मुस्लिम आबादी
पिछले चुनाव में आरजेडी, कांग्रेस, जेडीयू और एआईएमआईएम ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन सफलता सीमित रही।
प्रशांत किशोर का लक्ष्य क्या है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर जानते हैं कि बीजेपी का कोर वोट बैंक खिसकाना मुश्किल है। इसलिए उन्होंने उन हिंदू वोटरों पर नजरें टिकाईं हैं जो बीजेपी के खिलाफ वोट करते रहे हैं। वे मुसलमानों को महागठबंधन से हटाकर अपने पाले में लाना चाहते हैं।
उनका संकेत साफ है—
- जन सुराज पार्टी बिहार में मुस्लिम उम्मीदवारों को ज्यादा टिकट देगी।
- गांधी–आंबेडकर की विचारधारा के साथ नई राजनीति की पटकथा लिखी जाएगी।
- 2025 के चुनाव में मुस्लिम–हिंदू गठजोड़ नया राजनीतिक फैक्टर बन सकता है।
नतीजे क्या हो सकते हैं?
अगर मुस्लिम वोट बैंक महागठबंधन से खिसकता है तो RJD और कांग्रेस को बड़ा नुकसान होगा। जन सुराज पार्टी खुद को तीसरे विकल्प के रूप में पेश कर सकती है। बीजेपी को सीधा फायदा नहीं, लेकिन विपक्ष की एकता कमजोर होगी।


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