शीतकालीन सत्र के बीच तेजस्वी ‘लापता’, यूरोप यात्रा के दावे से सियासत में हलचल, शिवानंद तिवारी का बड़ा हमला

बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र से तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी पर शिवानंद तिवारी ने बड़ा दावा करते हुए उनके यूरोप यात्रा पर होने की बात कही है, जिससे आरजेडी की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

शीतकालीन सत्र के बीच तेजस्वी ‘लापता’, यूरोप यात्रा के दावे से सियासत में हलचल, शिवानंद तिवारी का बड़ा हमला
Tejashwi Yadav

बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान गुरुवार को जब सदन की कार्यवाही अपने चौथे दिन में पहुंची, तो नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी हर किसी की नजर में खटकती रही। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल गूंजता रहा कि जब सरकार को घेरने का सबसे अहम वक्त है, तो विपक्ष का सबसे बड़ा चेहरा सदन से बाहर क्यों है। इसी बीच आरजेडी के ही वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने तेजस्वी की अनुपस्थिति को लेकर ऐसा बयान दे दिया, जिसने सियासी पारा और चढ़ा दिया।

यूरोप यात्रा का दावा बना विवाद की जड़
शिवानंद तिवारी ने दावा किया कि तेजस्वी यादव न केवल सदन की कार्यवाही से दूर हैं, बल्कि अपने पूरे परिवार के साथ यूरोप यात्रा पर निकल चुके हैं। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि तेजस्वी ने इस अहम मौके पर “मैदान छोड़ दिया” है। अपने ही दल के नेता पर इतना सीधा हमला आरजेडी की अंदरूनी राजनीति में चल रहे तनाव को भी उजागर करता है। पार्टी के भीतर भी इसे लेकर फुसफुसाहट तेज हो गई है कि आखिर सही तस्वीर क्या है।

विपक्ष के नेतृत्व पर उठे गंभीर सवाल
इतने पर ही शिवानंद तिवारी नहीं रुके। उन्होंने तेजस्वी यादव की राजनीतिक क्षमता पर भी सवाल उठा दिए। उनका कहना था कि अगले पांच वर्षों तक नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाने की ताकत तेजस्वी में नहीं दिखती। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि राज्यपाल के अभिभाषण के दिन भी तेजस्वी सदन में मौजूद नहीं थे। पहले उनके दिल्ली जाने की बात कही गई, फिर अब उनके यूरोप जाने की चर्चा सामने आ रही है। ऐसे में सवाल सिर्फ गैरमौजूदगी का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से दूरी का भी खड़ा होता दिख रहा है।

बिहार की सियासत में बड़ी वैचारिक चेतावनी
शिवानंद तिवारी ने आगे कहा कि तेजस्वी के राजनीतिक मैदान से हटने से बिहार में विरोध की राजनीति का पूरा स्पेस खाली होता जा रहा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि नीतीश कुमार का पूरे पांच साल मुख्यमंत्री बने रहना भी संदेह के घेरे में है। तिवारी ने यह कहकर सियासी हलकों में और हलचल मचा दी कि बिहार पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का झंडा फहराने का सपना धीरे-धीरे साकार होता नजर आ रहा है। इसके लिए आखिर जिम्मेदार कौन है, यह सवाल भी उन्होंने सियासत के पाले में उछाल दिया।

पहले ही सत्र में बढ़ गया सस्पेंस
गौरतलब है कि तेजस्वी यादव को मंगलवार को ही औपचारिक रूप से नेता प्रतिपक्ष चुना गया था। इसके ठीक अगले दिन बुधवार को वह सदन में नजर नहीं आए, जबकि उसी दिन राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का अभिभाषण हुआ था। बिहार विधानसभा का यह शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से शुरू होकर 5 दिसंबर तक चलना है और यह 18वीं विधानसभा का पहला सत्र है। ऐसे अहम सत्र से विपक्ष के नेता की दूरी राजनीतिक संकेतों को जन्म दे रही है।