युद्ध की मार: विदेशों में CBSE बोर्ड परीक्षा संकट, क्या होगा छात्रों का भविष्य?

मिडिल ईस्ट में युद्ध का असर सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं पर पड़ा है। दसवीं की परीक्षा रद्द और बारहवीं टली। जानिए कैसे कोरोना काल वाला फॉर्मूला रिजल्ट समय पर जारी करने का रास्ता बन सकता है।

युद्ध की मार: विदेशों में CBSE बोर्ड परीक्षा संकट, क्या होगा छात्रों का भविष्य?

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर अब शिक्षा व्यवस्था पर भी साफ दिखने लगा है। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए हैं कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को कई देशों में दसवीं बोर्ड की परीक्षाएं रद्द करनी पड़ी हैं, जबकि बारहवीं की परीक्षाएं फिलहाल सोलह मार्च तक टाल दी गई हैं। बोर्ड ने कहा है कि स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है और हालात सामान्य होने पर आगे की परीक्षाओं की नई तारीखों की घोषणा की जाएगी। हालांकि मौजूदा संकेत बताते हैं कि युद्ध जल्दी खत्म होने की संभावना कम है, इसलिए वहां पढ़ रहे छात्रों के सामने अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।

लाखों छात्रों की पढ़ाई और करियर दांव पर
CBSE देश का सबसे बड़ा स्कूल बोर्ड है और हर साल लगभग बयालीस लाख विद्यार्थी दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं में शामिल होते हैं। इनमें करीब सत्तर प्रतिशत छात्र भारत के स्कूलों से होते हैं, जबकि लगभग तीस प्रतिशत विद्यार्थी विदेशों के संबद्ध स्कूलों से परीक्षा देते हैं। विदेशों में सबसे अधिक ऐसे स्कूल मिडिल ईस्ट के देशों—बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात—में हैं। इन स्कूलों के अधिकांश छात्र आगे की पढ़ाई के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा आयोजित मेडिकल, इंजीनियरिंग और केंद्रीय विश्वविद्यालयों की प्रवेश परीक्षाओं में भाग लेते हैं।

रिजल्ट में देरी से प्रवेश परीक्षाओं पर असर
समस्या यह है कि यदि युद्ध के कारण बारहवीं के परिणाम जारी करने में देरी होती है, तो विदेशों में पढ़ रहे कई छात्र मेडिकल, इंजीनियरिंग और विश्वविद्यालयों की प्रवेश परीक्षाओं में शामिल नहीं हो पाएंगे। दूसरी तरफ अगर प्रवेश परीक्षाओं की तारीखें आगे बढ़ाई जाती हैं तो देश भर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों का नया शैक्षणिक सत्र भी देर से शुरू होगा। ऐसे में इसका असर केवल विदेशों के छात्रों पर ही नहीं बल्कि भारत के लाखों छात्रों पर भी पड़ सकता है।

वैकल्पिक मूल्यांकन फॉर्मूले पर विचार
दसवीं की परीक्षाएं रद्द होने के बाद अब परिणाम तैयार करने के लिए एक विशेष फार्मूले पर चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि यदि हालात जल्द सामान्य नहीं होते हैं तो बारहवीं के परिणाम भी इसी तरह के वैकल्पिक तरीके से घोषित किए जा सकते हैं। अभी बारहवीं की नई परीक्षा तिथियों का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन युद्ध लंबा खिंचने की आशंका को देखते हुए बोर्ड को वैकल्पिक व्यवस्था अपनानी पड़ सकती है।

कोरोना काल वाला फॉर्मूला बन सकता है समाधान
खाड़ी क्षेत्र के एक प्रमुख अखबार की रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त अरब अमीरात में दसवीं के परिणाम तैयार करने के लिए जिस फॉर्मूले पर चर्चा हो रही है, वह कोरोना महामारी के दौरान भी इस्तेमाल किया गया था। इस पद्धति में छात्रों का मूल्यांकन आंतरिक अंक, प्रैक्टिकल और उनके पिछले सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के आधार पर किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध की स्थिति लंबी चलती है तो यही तरीका बारहवीं के छात्रों के लिए भी अपनाया जा सकता है, जिससे परिणाम समय पर जारी करना संभव हो सके।